स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स की ओर से सालाना प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) को रद्द किए जाने और दोबारा लिखने के कथित आदेश के खिलाफ भारतीय वन सेवा के विवादित अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने कैट का दरवाजा खटखटाया है।
चौधरी का दावा है कि उनकी ओर से किया गए सेल्फ अप्रेजल पर शीर्ष अधिकारियों ने मुहर लगाई थी और इसे बेहतर ग्रेड में शामिल किया था।
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल (कैट) को दी गई अपनी शिकायत में चतुर्वेदी में मंत्रालय और एम्स की ओर से 28 मई को दिए गए आदेश को बदले की कार्रवाई करार दिया।