13 साल पहले ही बायपास (ओपन हार्ट) सर्जरी हो चुकी थी। हाल में उनका हार्ट फूलने लगा था जो कि वॉल्व में रिसाव का परिणाम था। ऐसे मरीजों में वॉल्व की मरम्मत की जाती है या उसे बदला जाता है, लेकिन अक्सर यह सर्जरी काफी जोखिम भरी होती है और कई बार ऐसे मामलों में मरीज को कोई फायदा भी नहीं मिलता।
लिहाजा इस मामले में डॉक्टरों ने उनके लिए मिट्राक्लिप प्रोसीजर चुना जो कि सफल रहा है। वहीं प्रोफेसर सैबल कार ने तकनीक को लेकर बताया कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित सीओएपीटी परीक्षण से यह साबित हुआ है कि मिट्राक्लिप प्रोसीजर से न सिर्फ मरीज की हालत बल्कि उसे 2 साल से अधिक का जीवनदान भी मिलता है।
चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने बताया कि मिट्राक्लिप तकनीक दरअसल हृदय के भीतर स्थित वाल्व की मरम्मत करने की कैथेटर आधारित नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें मरीज के ग्रॉइन के भीतर एक बड़ी रक्तवाहिका से स्पेशल कैथेटर को हार्ट के दाएं चैंबर से होते हुए बाएं चैंबर में डाला जाता है।
हालांकि ऐसा करने के लिए दोनों के बीच मौजूदा पार्टिशन में छेद करना पड़ता है। इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी और एक्स-रे की मदद से उस वाल्व पर एक क्लिप लगाई जाती है, जिससे रिसाव हो रहा होता है। मरीज को आमतौर पर 24-48 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाती है।