इंदिरापुरम इलाके में स्थित महीउददीनपुर कनावनी गांव अब गाजियाबाद का हिस्सा बन गया है। विगत दिनों राज्यपाल के नोटिफिकेशन के बाद गौतमबुद्ध नगर जनपद की दादरी तहसील से हटाकर कनावनी गांव को अब गाजियाबाद की सदर तहसील में शामिल कर लिया गया है।
हिंडन पुस्ता किनारे स्थित कनावनी गांव की कुछ भूमि पर ही इंदिरापुरम योजना बसाई गई थी। पहले कनावनी गांव गाजियाबाद का ही हिस्सा था, मगर बाद में इसे गौतमबुद्ध नगर में शामिल कर दिया गया।
भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यह गांव पूरी तरह से गाजियाबाद का ही हिस्सा था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी इसे गौतमबुद्ध नगर में शामिल किए जाने का विरोध हुआ था।
जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को उठाया था। नतीजा यह रहा कि शासन स्तर से लंबी प्रक्रिया के बाद आखिर कनावनी अब गाजियाबाद को मिल ही गया।
इसके साथ ही दोनों जिलों की सीमाओं में भी परिवर्तन हो गया। डीएम विमल कुमार शर्मा ने बताया कि राज्यपाल के नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही कनावनी गांव को गाजियाबाद में शामिल किए जाने की औपचारिकताएं भी पूरी की जा रही हैं।
एआईजी स्टांप जीपी सिंह ने बताया कि कनावनी के गाजियाबाद में शामिल होने के बाद अब इस गांव की जमीनों की रजिस्ट्री गाजियाबाद तहसील में ही होंगी।
इसके लिए सभी सब-रजिस्ट्रारों के साथ ही संबंधित विभागों से पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह या फिर नए साल में जनवरी माह से कनावनी गांव की संपत्तियों की रजिस्ट्री सदर तहसील में ही की जाएगी।
कनावनी की जमीन पर रहने वालों की समस्या दूर
कनावनी गांव पर जीडीए और नोएडा की खींचतान आखिरकार खत्म हो गई। अब कनावनी गांव आधिकारिक रूप से जीडीए की सीमा में शामिल होने से गांव की जमीन पर बसी गगनचुंबी इमारतों के रेजिडेंट्स को अब नोएडा की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस फैसले से यहां बसी 32 सोसायटीज के हजारों रेजिडेंट्स को राहत मिली है।
गाजियाबाद में रहते हुए भी पुलिस, रजिस्ट्री, प्रशासन और न्यायालय संबंधी मामलों के लिए नोएडा की दौड़ लगानी होती थी। एनएच-24 से गाजियाबाद की ओर कनावनी गांव पड़ता है।
कनावनी गांव की जमीन पर ही जीडीए की इंदिरापुरम, अहिंसाखंड-2, आवास विकास परिषद की वसुंधरा आदि योजनाएं बसी हैं। यह गांव जीडीए की सीमा में होने के बावजूद राजस्व ग्राम नोएडा में था।
इसलिए यहां होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री का शुल्क नोएडा लेता रहा है। गांवों की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर जीडीए अपने अधिकार क्षेत्र में लेना चाहता था।
जिला प्रशासन के साथ पूर्व वीसी संतोष यादव ने प्रस्ताव शासन को भेजा था। इंदिरापुरम आवासीय योजना का अहिंसाखंड-2 का क्षेत्र कनावनी की जमीन पर विकसित किया गया।
गांव गौतमबुद्ध नगर के अंतर्गत आता था। जिसके चलते अहिंसाखंड-2 में बसने वालों को गाजियाबाद में होते हुए भी नोएडा के चक्कर काटने पड़ते थे। इस संदर्भ में लंबे समय से मांग भी की जा रही थी।
गांव के विकास को मिलेगी गति
कनावनी गांव गाजियाबाद की सीमा में होते हुए भी परिसीमन की खामी के चलते नोएडा में शामिल था। नोएडा में होने के चलते जीडीए ने गांव की जमीन पर इंदिरापुरम योजना के अंतर्गत इमारतें को बनाई लेकिन गांव को बदहाल ही छोड़ दिया। गांव का विकास जीडीए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था, जिससे गांव का विकास रुक गया था।
आरडब्ल्यूए विवाद में प्रशासन देगा दखल
अहिंसाखंड-2 की कई सोसायटीज में आरडब्ल्यूए विवाद सामने आए। डिप्टी रजिस्ट्रार समस्या के निस्तारण के लिए नोएडा प्रशासन को निर्देश देते थे, जिसके चलते दिक्कत पेश आती थी।
नोएडा प्रशासन से मसलों को हल करने में मदद नहीं मिल पाती थी। अब गाजियाबाद प्रशासन का दखल होने से राहत मिलेगी।
यह गांव शामिल तो जीडीए की सीमा में हैं, पर राजस्व ग्राम नोएडा के हैं। इसलिए यहां होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री का शुल्क नोएडा लेता है।
अपराध रुकेंगे
अंहिसाखंड-2, वसुंधरा के लोगों को चेन स्नैचिंग, लूट, हत्या की शिकायत दर्ज कराने में सहूलियत होगी। यह इंदिरापुरम थाने के अंतर्गत आएगा। कनावनी में इंदिरापुरम की चौकी बनने से अपराध में कमी आएगी।