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चंडीगढ़: मेडिकल काउंसिल की वेबसाइट में सेंध लगाकर कराया डॉक्टर का फर्जी रजिस्ट्रेशन, फिर ऐसे हुआ खुलासा

Sat, 17 Oct 2026 06:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

जांच में सामने आया कि तीनों ने बिहार मेडिकल काउंसिल से एनओसी प्राप्त की है। जांच में एनओसी भी फर्जी मिली।
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साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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हरियाणा में तीन युवकों ने मेडिकल काउंसिल की पुरानी वेबसाइट पर सेंध लगा डॉक्टर का फर्जी रजिस्ट्रेशन कर लिया। विभाग ने जब पुरानी वेबसाइट का डाटा नई पर ट्रांसफर किया तो रजिस्ट्रेशन नंबर का अलर्ट आया। इसमें बताया गया 3 रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किए गए हैं फिर भी रजिस्टर्ड दिखाए जा रहे हैं। विभाग ने जांच की तो युवाओं के नाम सामने आए। जांच में सामने आया कि तीनों ने बिहार मेडिकल काउंसिल से एनओसी प्राप्त की है। जांच में एनओसी भी फर्जी मिली।

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हरियाणा मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन डाॅ. सतीश कुमार खट्टर ने बताया कि मामले की शिकायत पंचकूला साइबर क्राइम थाने में दी गई है। इसमें सुमन कुमार, स्वर्णब और दीपक कुमार के नाम सामने आए हैं। सुमन कुमार और स्वर्णब ने रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) से एमबीबीएस की पढ़ाई करने का दावा किया था। वहीं, दीपक कुमार ने अंबाला स्थित महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी एवं मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना दिखाया था। 

काउंसलिंग में तीनों में से कोई नहीं पहुंचा मामले का पता चलने के बाद हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने तीनों युवकों को डिग्री और एनओसी के दस्तावेज दिखाने (काउंसलिंग) के लिए पंचकूला स्थित कार्यालय में बुलाया था लेकिन तीनों में से कोई भी काउंसिल के कार्यालय नहीं पहुंचा। इससे अधिकारियों का शक और गहरा गया। 
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इसके बाद मामले की शिकायत दर्ज कराई गई। अब जांच में पता लगाया जाएगा कि पुरानी वेबसाइट में किस तरह छेड़छाड़ की गई और फर्जी एनओसी के आधार पर डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर कैसे हासिल किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए काउंसिल ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपनी पुरानी वेबसाइट बंद कर दी है।

एमबीबीएस के छात्रों को फर्स्ट ईयर की परीक्षा पास करने के लिए मिलेगा एक और मौका
लगातार बढ़ते तनाव और आत्महत्याओं के मामलों को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी ने मेडिकल स्टूडेंट्स को बड़ी राहत दी है। एमबीबीएस के पहले वर्ष की परीक्षा पास करने के लिए तय चारों मौके गंवा चुके पात्र छात्रों को अब एक और मौका मिलेगा। एनएमसी ने 2019-20 और उसके बाद के शैक्षणिक सत्रों में एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को एक अतिरिक्त प्रयास देने की मंजूरी दी है।

यह राहत उन छात्रों के लंबित मामलों के लिए है, जो कोरोना महामारी के दौरान पढ़ाई में आई रुकावटों, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या दूसरी निजी परेशानियों के कारण परीक्षा पास नहीं कर सके। आयोग के मुताबिक, यह एक बार के लिए दी गई विशेष राहत है। इसका लाभ हर छात्र को अपने आप नहीं मिलेगा, बल्कि तय शर्तें पूरी करने वाले छात्रों को ही अतिरिक्त मौका दिया जाएगा।

  • कुल पांच बार परीक्षा देने की अनुमति  एनएमसी के आदेश के अनुसार, पात्र छात्र एमबीबीएस की पहली व्यावसायिक परीक्षा पास करने के लिए निर्धारित चार प्रयासों के अलावा एक और प्रयास कर सकेंगे। यानी उन्हें कुल पांच बार परीक्षा देने की अनुमति होगी। यह अतिरिक्त मौका उन छात्रों को भी मिल सकता है, जिनकी पहली व्यावसायिक परीक्षा पूरी करने की निर्धारित चार साल की अवधि बीत चुकी है। 
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