विशेषज्ञों का कहना है कि हमारा शरीर एक निश्चित तापमान में ही काम कर पाता है। यदि शरीर का तापमान बढ़ता है तो दिक्कत हो सकती है। यह हमारे हार्मोन और प्रोटिन को प्रभावित करता है। ऐसा होने पर शरीर में तुरंत व लंबे समय में परेशानी हो सकती है। तुरंत होने वाली परेशानी में दाने निकलना, त्वचा खराब होना, जांघ पर फंगल संक्रमण, सिर में दर्द होना, मतली आना सहित दूसरी परेशानी हो सकती है। वहीं लंबे समय तक धूप में रहने के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक सिर में दर्द बने रहना, फूड पॉइजनिंग, डायरिया, लू लगना, आंखों में लाल पन होना सहित दूसरी दिक्कत हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ विशेष सतर्कता पर ध्यान देना चाहिए। कोशिश करें की धूप में ज्यादा न रहें। यदि किसी कारण धूप में रहना पड़ता है तो हर घंटे छाए में आए। समय-समय पर पानी पीते रहें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो पाए।
हीट वेव से बचने के लिए क्या करें।
- दिन में कम से कम तीन लीटर पानी पीयें
- यदि धूप में काम करते हैं तो हर घंटे शरीर को छाया में कुछ देर आराम दें
- अनावश्यक धूप में जाने से बचें
- ढीले व हल्के रंग के कपड़े पहने
उलटी आए तो पीये नींबू-पानी
जग प्रवेश अस्पताल में आयुष विभाग में वरिष्ठ डॉ. नीरज त्रिपाठी ने बताया कि यदि धूप में रहने के कारण यदि कभी चक्कर आए तो बचाव के लिए तुरंत नीबू पानी, गन्ने या दूसरा जूस, आम पन्ना पीयें और कुछ देर छाया में आराम करें। मौसम बदलने के साथ ही शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए शरीर में पानी की जरूरत है। ऐसे में तरबूज, खरबूज, आम व दूसरे मौसमी फल व ककड़ी, खीरा व दूसरे मौसमी सब्जी का सेवन बढ़ाएं। साथ ही दिन में नीबू पानी, सत्तू का घोल व दूसरे तरल पदार्थ जरूर लें।
इनसे बचें
- काफी देर पहले बना या तला हुआ खाने का सेवन न करें
- बासी खाना न खाएं
हीट स्ट्रोक में देरी से इलाज से हो सकती है मौत
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर व जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) से हीट वेव को लेकर बनाए गए नोडल अधिकारी डॉ. अजय चौहान ने बताया कि हीट स्ट्रोक होने पर यदि समय पर इलाज न मिले तो 80 फीसदी मरीजों की मौत हो सकती है। ऐसे मरीजों को तुरंत ठंडे पानी में बैठा देना चाहिए। साथ ही जांघ, बगल, सिर व दूसरे हिस्से में ठंडे पानी की पट्टी लगाए। उनका कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही अस्पताल में चक्कर, बेहोस होने व दूसरे कारण से बच्चे व बुजुर्ग पहुंचते हैं। ऐसे मौसम में इनपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बदलते जलवायु परिवर्तन के साथ समस्या बढ़ रही है। साल 2015 से 2019 के बीच हीट वेव के कारण देश में 3775 लोगों की मौत होने के आंकड़े हैं।