केजरीवाल सरकार के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें कोरोना संदिग्धों, बिना लक्षण वाले लोगों और ठीक हो चुके लोगों के निजी प्रयोगशालाओं में कोविड-19 परीक्षण पर रोक लगाई गई थी। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के इस आदेश को खारिज किया जाए, ताकि लोग निजी लैब में अपनी कोरोना जांच करा सकें। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।
यह याचिका 71 वर्षीय महिला रेणु गोस्वामी ने वकील केतकी गोस्वामी और शुभांगिनी जैन के माध्यम से दायर की है। रेणु गोस्वामी कोरोनरी धमनी रोग और उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। उनके कोरोना संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है।
सरकार द्वारा निजी लैब में टेस्टिंग पर रोग लगाने के कारण वे अपनी जांच नहीं करा पा रही हैं, जिससे उन्हें संतुष्टि हो सके कि वे सुरक्षित हैं। याचिका में उन्होंने कहा कि 2 जून को दिल्ली सरकार ने निजी लैबों में कोरना संदिग्धों और कोरोना से ठीक हो चुके लोगों की जांच पर रोक लगाई है। अब वहां केवल लक्षणों वाले मरीज ही जांच करा सकते हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर जांच जरूरी है।
याचिका में उन्होंने कहा कि कोरोना का कोई टीका नहीं होने की स्थिति में मरीजों के उपचार, परीक्षण और आइसोलेशन की पद्धति भी मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में संक्रमण के प्रसार और महामारी को फैलने से रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग महत्वपूर्ण साबित होगी। स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में फ्रंटलाइन कर्मियों पर बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए भी बड़े पैमाने पर टेस्टिंग जरूरी है।
संक्रमण को रोकने के लिए आर्थिक गतिविधियों पर सोशल डिस्टेंसिंग और प्रतिबंधों को लागू करने का फायदा तभी होगा, जब टेस्टिंग बड़े पैमाने पर की जाएगी। कोरोना के मामलों में बढ़ोत्तरी से बचने के लिए पहले ही ज्यादा लोगों की जांच करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कौन कोरोना की चपेट में है और कौन नहीं।