-देर से पहुंचने और बीच रास्ते उतरने के लिए खींची जा रही अलार्म चेन, सबसे ज्यादा असर दिल्ली-एनसीआर रूट पर
-अधिक प्रभावित क्षेत्रों में गाजियाबाद, गुरुग्राम, नई दिल्ली, पानीपत और रोहतक स्टेशन शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के व्यस्त रेल रूटों पर अलार्म चेन पुलिंग रेलवे के लिए बड़ी परिचालन चुनौती बनती जा रही है। देर से स्टेशन पहुंचने, बीच रास्ते उतरने या परिचित यात्रियों को चढ़ाने-उतारने जैसे कारणों से ट्रेनों की चेन खींचे जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसका असर केवल संबंधित ट्रेन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सेक्शन में पीछे चल रही मेल, एक्सप्रेस और उपनगरीय ट्रेनों पर पड़ रहा है।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान अलार्म चेन पुलिंग (एसीपी) के दुरुपयोग के मामलों में 5,180 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 2026 में अप्रैल तक 1,483 लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों में चेन पुलिंग वास्तविक आपात स्थिति के बजाय निजी सुविधा के लिए की जा रही है। रेलवे के मुताबिक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में गाजियाबाद, गुरुग्राम, नई दिल्ली, पानीपत और रोहतक स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली-गाजियाबाद-मुजफ्फरनगर, नई दिल्ली-सोनीपत-कुरुक्षेत्र, दिल्ली किशनगंज-रोहतक-जाखल, दिल्ली सराय रोहिल्ला-दिल्ली छावनी-गुरुग्राम और हजरत निजामुद्दीन-फरीदाबाद-पलवल सेक्शन चेन पुलिंग के लिहाज से संवेदनशील बने हुए हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार एक बार ट्रेन रुकने के बाद चालक और गार्ड को पूरी जांच प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इससे ट्रेन कई मिनट तक खड़ी रहती है और पीछे चल रही अन्य ट्रेनों की गति भी प्रभावित होती है। पीक आवर में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब एक ट्रेन के रुकने से पूरे कॉरिडोर का संचालन प्रभावित होने लगता है। गैर-जरूरी तरीके से चेन खींचना रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत अपराध है। दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल, एक हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।