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'चाय वाले' को मिलेगी स्कॉलरशिप

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चाय वाले आजकल चर्चा में हैं। देश में एक चाय वाला प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहा है तो इस औद्योगिक नगरी का चाय विक्रेता नेशनल खिलाड़ी बनने का ख्वाब लिए दिन रात मेहनत कर रहा है।
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सागर नामक इस खिलाड़ी की मेहनत भी रंग लाती हुई नजर आ रही है। अभी तक वह शासन की नजर में नहीं था लेकिन अब राज्य सरकार उसे स्कॉलरशिप देने पर मजबूर हो गई है। स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एप्टीट्यूट टेस्ट (स्पैट) में सेलेक्ट होने की वजह से उसे हर माह खेल के लिए 1800 रुपये मिलेंगे।

इस उपलब्धि से उसके इरादे और मजबूत हो गए हैं। तिगांव के रहने वाले जयनारायण सेक्टर-12 स्थित खेल परिसर के बाहर चाय की रेहड़ी लगाते हैं। इस काम में उनका बेटा सागर भी स्कूल से आने के बाद हाथ बंटाता है। पिता की मदद करने के साथ सागर खेलों पर भी ध्यान देता है। सागर उन सब के लिए मिसाल है जो अभावों का रोना रोते रहते हैं।
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पिता का सपना, सागर बने बड़ा ‌खिलाड़ी

रेहड़ी पर वह औसतन तीन घंटे बिताता है। 12 वर्ष के सागर का चयन स्पैट के लिए किया गया है। जहां उसे नेशनल स्तर की जिमनास्ट बनने की कोचिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि करीब पांच हजार प्रतिभागियों में से जिले के जिन 92 बच्चे विजेता हैं, उनमें इस चाय वाले का भी नाम है।

सेक्टर-नौ स्थित डीसी मॉडल स्कूल में नौंवी कक्षा का छात्र सागर न सिर्फ प्रतिभाशाली खिलाड़ी बल्कि एक होशियार विद्यार्थी भी है। सागर के जिमनास्ट बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। खेल परिसर के बाहर चाय की रेहड़ी लगाने वाले जयनारायण दो साल पहले तक मैदान में आने वाले खिलाड़ियों को अभ्यास करते हुए देखते थे।

उनके मन में भी अपने बेटे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने की इच्छा पैदा होती। लेकिन कोच के सामने अपनी यह इच्छा रख पाने की हिम्मत न होती। स्कूल से तीन बजे आने के बाद सागर अपने पिता की दुकान पर आकर उनका हाथ बंटाता था। खेल परिसर से बाहर निकलते खिलाड़ियों को देखकर सागर के मन में भी एक अच्छा खिलाड़ी बनने की इच्छा पैदा होती।
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चाय पीने आए जिमनास्टिक कोच तब बनी बात

यह बात लगभग डेढ़ साल पुरानी है। खेल परिसर के बाहर चाय की रेहड़ी लगाने वाले जयनारायण के मन में भी अपने बेटे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने की इच्छा पैदा होती। लेकिन कोच के सामने अपनी यह इच्छा रख पाने की हिम्मत न होती।

एक दिन चाय पीने के लिए जिमनास्टिक कोच अशोक सैनी जयनारायण की दुकान पर पहुंचे। जयनारायण ने कोच को चाय देते हुए कहा कि मेरे सागर को भी आप से कोचिंग मिल सकती है क्या। जयनारायण की बात सुनकर कोच ने तुरंत सागर को निशुल्क कोचिंग देने के लिए हामी भर दी।

जिसके बाद सागर का जिमनास्टिक की दुनिया में सफर शुरू हुआ। कोच अशोक सैनी के अनुसार सागर काफी प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। उसकी मेहनत को देखकर उम्मीद लगती है कि एक दिन वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का जिमनास्ट बनेगा। वहीं स्कॉलरशिप मिलने से उसके परिवार को भी आर्थिक रूप से थोड़ी राहत मिलेगी।
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