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'फांसी को उम्रकैद में बदलना अवैध'

Sun, 02 Mar 2014 01:40 AM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
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केंद्र सरकार ने दया याचिका के निपटारे में बेवजह की देरी के आधार पर मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को पुनर्विचार याचिका दायर की है। सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि 21 जनवरी का अदालत का फैसला स्पष्ट रूप से गैरकानूनी और त्रुटियों से भरा है।
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इस फैसले के तहत ही 15 दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में तब्दील किया गया था। साथ ही इसी फैसले ने राजीव गांधी के हत्यारों के लिए भी राहत का रास्ता साफ कर दिया था। सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि इस तरह के महत्वपूर्ण विषय पर संविधान पीठ को सुनवाई करनी चहिए थी और तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बगैर अधिकार क्षेत्र के ही यह फैसला दिया है।

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पुनर्विचार याचकि में कहा गया है कि यह फैसला स्पष्ट तौर पर कानून से विपरीत है। इसमें उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए फैसले में कई खामियां है और यह शीर्षस्थ अदालत, संविधान और दूसरे कानूनों की ओर से मौजूदा सुविचारित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। याचिका के अनुसार पेश मामले में देरी के आधार पर मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने का मसला उठाया गया था।
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जो दोषियों के पक्ष में कथित रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 को आरक्षित करता है। केंद्र ने याचिका में कहा है कि यह संविधान की व्याख्या का मसला है जिस पर पांच न्यायाधीशों की पीठ को विचार करना चाहिए था। ऐसी व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 145 में है। शीर्षस्थ अदालत के पहले के आदेश का हवाला देते हुए सरकार ने कहा है कि इस फैसले में कहा गया था कि टाडा के तहत हुए अपराध और दूसरे अपराधों के बीच अंतर है।

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इस फैसले में अदालत ने कहा था कि किसी भी दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते समय अपराध के स्वरूप पर विचार करना होगा। याचिका के अनुसार ऐसी स्थिति में पेश रिकॉर्ड को देखते हुए फैसले में खामी नजर आती है जिस पर पुनर्विचार की जरूरत है। याद रहे कि शीर्षस्थ अदालत ने हाल ही में दिए गए फैसले में चंदन माफिया वीरप्पन के चार सहयोगियों समेत 15 की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

साथ ही अदालत ने कहा था कि मानसिक विक्षिप्तता और सिजोफ्रेनिया से पीड़ित दोषियों के लिए मौत की सजा मुकर्रर नहीं की जा सकती। गौरतलब है कि फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि मौत की सजा को जारी रखना उन कैदियों के संबंध में अमनावीय प्रभाव डालेगा जो दया याचिका के लंबित रहने की वजह से मृत्युदंड के इंतजार की यातना को कई साल तक सहते रहे।

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कैदियों की सीमा से परे होने वाली देरी की स्थितियों को नियंत्रित किया जाना चाहिए और सजा की सूचना भी दी जानी चाहिए। शीर्षस्थ अदालत से जीवनदान पाने वाले 15 दोषियों में चंदन तस्कर वीरप्पन के सहयोगी गणप्रकाश, सिमोन, मीसेकर मदैया और बिलावांद्रा शामिल हैं।

अन्य कैदियों में सुरेश रामजी, गुरमीत सिंह, प्रवीण कुमार, सोनिया और उसके पति संजीव सुंदर सिंह और जाफर अली हैं। सुरेश, रामजी, गुरमीत सिंह और जाफर अली उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद है। हरियाणा के पूर्व विधायक रालूराम पुणिया की बेटी सोनिया और उसके पति संजीव हरियाणा में बंद हैं।
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