सीबीएसई ने साइबर बदमाशी और जासूसी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और डिजिटल आजादी व अधिकार एवं कर्तव्यों को लेकर छात्रों के लिए साइबर सुरक्षा के दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह गाइडलाइंस 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की स्वस्थ ऑनलाइन गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई है। बोर्ड ने कहा कि जब भी छात्रों को लगे कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर उन्हें कोई असहज कर रहा है, तो वह तुरंत उसे ब्लॉक कर दें या इसकी शिकायत करें।
यह गाइडलाइंस ऐसे समय में तैयार की गई है जब छात्रों की डिजिटल दुनिया में पहुंच ज्यादा बढ़ी है। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन में जब नियमित कक्षा नहीं लग रही है, ऐसे में डिजिटल क्लास का चलन और उसकी जरूरत बढ़ गई है। सीबीएसई ने कहा कि यह दिशानिर्देश साइबर पीस फाउंडेशन की मदद से तैयार किए गए हैं।
आज ज्यादातर युवा तकनीक के व्यापक इस्तेमाल को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं। ये अक्सर जानकारी पाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे कई बार गुमराह भी हो जाते हैं। कई बार किसी अनजान वेबसाइट से जानकारी लेने में उन्हें यह परेशानी होती है कि जो जानकारी वह ले रहे हैं वह भरोसेमंद है भी या नहीं। वह उस सर्च इंजन की रैंकिंग को देखकर भरोसा कर लेते हैं।
दिशानिर्देश में गंभीर खतरे व बचाव के उपाय
दिशानिर्देश में जहां साइबर दादागीरी, धमकी, मानहानि, भावनात्मक दोहन, ऑनलाइन यौन हिंसा, कट्टरपन, हमले और धोखाधड़ी जैसे विषयों को शामिल किया गया है। वहीं इसमें डिजिटल नागरिकता, साक्षरता, संचार, लोकाचार, स्वास्थ्य और खुशहाली के अलावा अधिकार, कर्तव्य एवं आजादी व कानून की बात भी कही गई है।
गुप्त जोखिम से अनजान छात्र फंसते हैं मुसीबत में
बोर्ड ने कहा कि वह नहीं समझ पाते कि यह कैसे काम करता है या ताकतवर व्यावसायिक ताकतें किस तरह सर्च इंजन की सूची में शीर्ष पर पहुंच जाती हैं। छात्र उसके गुप्त जोखिम से अनजान होते हैं और कई बार उनकी खुद की हरकतों से वह मुसीबत में फंस जाते हैं। इन्हीं सबसे आगाह करने के लिए नया दिशानिर्देश जारी किया गया है।