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तनाव रहित पढ़ाई और स्व मूल्यांकन से लिखी बुलंदी की कहानी

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सफलता का उत्साह - फोटो : अमर उजाला
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जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है, अपने इरादों का इम्तिहान अभी बाकी है, अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन हमने, पूरा आसमान अभी बाकी है...। कुछ ऐसे ही जोश से लबरेज दिखे सीबीएसई की ओर से सोमवार को जारी किए गए दसवीं के नतीजों में दिल्ली और देशभर में संयुक्त रूप से टॉपर रहने वाले हासिल करने वाले विद्यार्थी। मेधावियों ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी सफलता की कहानी को बयां करने के साथ ही भविष्य की योजनाओं और सफलता के लिए अपनाए गए तरीकों को साझा किया...

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हर दिन पढ़ाई का लक्ष्य निर्धारित कर पाई मंजिल: शिविका

बोर्ड परीक्षा में टॉप करने के आधार पर मैंने तैयारी नहीं की थी। बस आम लोगों की डॉक्टर बनकर सेवा करने के मकसद से घंटों पढ़ाई की बजाय हर दिन का लक्ष्य निर्धारित कर तैयारी की और नतीजा उम्मीद से बढ़कर आया। यह कहना है सीबीएसई बोर्ड की दसवीं में 500 में से 498 अंक हासिल कर देश भर में दूसरे और दिल्ली की टॉपर शिविका दुदानी का। शिविका ने बताया कि वह एक विषय में कुछ चैप्टर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित करती थी। इसके बाद विभिन्न ढंग से उन चैप्टर की खुद ही परीक्षा लेती थी, ताकि बोर्ड परीक्षा की अच्छे से तैयारी हो सके। दिल्ली में टॉप और देशभर में दूसरा स्थान मिलेगा, इसका यकीन भी नहीं था। मेरी सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता, शिक्षक व दोस्तों को जाता है, जोकि हमेशा मेरे गाइड बनकर हर दुविधा दूर करते थे। लाजपत नगर निवासी शिविका ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। इसीलिए 11 वीं में  जीव विज्ञान, मनोविज्ञान, भौतिक विज्ञान विषयों को चुना है। शिविका कहती हैं कि दस से 14 घंटे तक पढ़ाई करते रहने से सफलता नहीं मिलती है, बल्कि तैयारी शुरू करने से पहले लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उसके बाद जो भी पढ़ाई करें, उसकी पहले खुद ही परीक्षा लें। इस तरह लगातार अभ्यास निश्चित तौर पर सफलता दिलाता है। शिविका की मां डॉ. शर्मिला दुदानी  भारतीय सेना के दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल (आरआर) में प्रोफेसर हैं। जबकि पिता जयदीप दुदानी इंजीनियर हैं। शिविका पुष्प विहार दिल्ली के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की छात्र है।
स्कोर कार्ड
अंग्रेजी  100
सामाजिक विज्ञान 100
 विज्ञान  100
हिंदी 98
गणित 98
सक्सेस मंत्र
किताबों का तनाव ऑर्ट एंड क्रॉफ्ट से दूर किया
शिवानी किताबों का तनाव दूर करने के मकसद से ऑर्ट एंड क्रॉफ्ट से भी जुड़ी हुई हैं। वह कहती हैं मुझे आर्ट एंड क्रॉफ्ट पसंद है। इसके माध्यम से तनाव दूर होता है और पढ़ाई में भी मदद मिलती है। मैं स्कूल में आयोजित होने वाले ओलंपियाड में भी हिस्सा लेती रही हूं। कई प्रतियोगिताओं अवार्ड भी जीते हैं। मैं बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों कहना चाहती हूं कि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पसंद की एक्टिविटी में भी भाग लेना चाहिए। इससे आगे बढ़ने में काफी मदद मिलती है। इस तरह की गतिविधियां पढ़ाई का दबाव नहीं बनने देती हैं और दिमाग को शांत रखने में मदद मिलती है।
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मोदी के चलते राजनीति में रुझान बढ़ा
शिवानी ने बताया कि पहले उसकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से मैं प्रभावित होने के कारण राजनीति गतिविधियों की जानकारी रखने लगी हूं। 
 

यूपीएससी टॉपर टीना डाबी को माना आइडियल:  मल्लिका अजमानी 


दिल्ली के गोल मार्केट स्थित कंवेंट ऑफ जीजस एंड मैरी स्कूल की छात्रा मल्लिका अजमानी ने 500 में से 497 अंक हासिल कर दिल्ली में दूसरा स्थान हासिल किया है। मल्लिका अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता और कठिन परिश्रम को देती हैं। मल्लिका ने बताया कि मुझे सीबीएसई 12वीं कक्षा व यूपीएससी टॉपर टीना डाबी बेहद पसंद है। मैं भी उन्हीं की तरह यूपीएससी परीक्षा पास कर विदेश सेवा में जाना चाहती हूं। मैं अलग से कोई तैयारी नहीं करती थी, बल्कि जो भी स्कूल में दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाया जाता, उसका घर आकर दोबारा अभ्यास करती थी। उसी अभ्यास के तहत में खुद अपनी परीक्षा भी लेती थी। मां शिक्षिका (कंवेंट ऑफ जीजस एंड मैरी स्कूल में गणित की शिक्षक)  हैं, जिसके चलते वे शिक्षक के रूप में तैयारी करवाते हुए घर पर ली गई परीक्षा के पेपर भी जांचती थीं। बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत पहले से तय समय पर पढ़ाई, खाना और टेनिस खेलना जारी रखा। इससे पढ़ाई के साथ तनाव भी दूर रहा। मां खुद एक शिक्षिका हैं, जिसके चलते टयूशन की जरूरत नहीं पड़ी। वह 11 वीं में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायनिक विज्ञान के साथ कंप्यूटर विषय चुनेंगी। 

स्कोर कार्ड
गणित 100
सामाजिक विज्ञान 100
हिंदी 100
अंग्रेजी 99 
विज्ञान 98


 

माता पिता की तरह ही डॉक्टर बनना चाहती हैं नेहा 

सलवान पब्लिक स्कूल की नेहा जैन ने भी 10 वीं के नतीजों में 497 अंक हासिल कर दिल्ली में तीसरा स्थान हासिल किया है। अपनी सफलता से उत्साहित नेहा ने बताया कि वह डॉक्टर बनकर अपने माता पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्ररेणा उनके अपने माता-पिता से ही मिली हैं जो स्वयं डॉक्टर हैं।  
नेहा ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय भी अपने माता-पिता व भाई-बहन को दिया। उसने बताया कि माता-पिता ने उस पर कभी भी परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करने के लिए दबाव नहीं बनाया। नेहा खेलकूद में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती हैं और स्कूल स्तर पर टेबल टेनिस खेलती हैं। उसने कहा कि वो जब भी पढ़ाई का दबाव महसूस करती थी छोटे भाई-बहन अपनी शरारतों से उसके तनाव को दूर करते थे।
स्कोर कार्ड
अंग्रेजी 99
गणित  99
विज्ञान 99 
संस्कृत 100
सामाजिक विज्ञान 100
 

त्वचा रोग चिकित्सक बनना चाहती हैं कल्पना

कल्पना कुमारी ने 497 अंक हासिल कर दसवीं के नतीजों में दिल्ली में दूसरी और संयुक्त रूप से देश भर में तीसरी रैंक हासिल की है। कल्पना अपनी आगे की पढ़ाई मेडिकल स्ट्रीम में करना चाहती हैं। कल्पना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और अध्यापकों को दिया है। उसका मानना है कि मन लगाकर पढ़ाई की जाए तो इस तरह की सफलता मिलना आसान होता है। वह  त्वचा चिकित्सक बनना चाहती हैं साथ ही सिविल सेवा को विकल्प के तौर पर देख रही हैं। कल्पना की माता अध्यापिका हैं और पिता कैमिकल इंजीनियर हैं। कल्पना ने बताया कि वो कैलिग्राफी भी करती हैं जो उनको तनाव से बचाए रखता है।  कल्पना को किताबें पढ़ने का शौक है वो पाठ्यक्रम के अलावा भी पुस्तकें पढ़ती हैं, जॉर्ज ऑरवेल और डैन ब्राउन उनके पसंदीदा लेखक हैं। वो मानती हैं कि जो किताबों को अपना दोस्त मानता है वो कभी तनाव में नहीं जा सकता है।   

स्कोर कार्ड
गणित 100
विज्ञान 100
सामाजिक विज्ञान 99
अंग्रेजी 99
हिंदी  99 
 
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राष्ट्रीय स्तर पर कैरम खेल चुकी हैं खुशी रावत 

रोहिणी के बाल भारती स्कूल की खुशी रावत चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की ख्वाहिश रखती हैं। 500 में 497 अंक हासिल कर दिल्ली में दूसरे और देश भर में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहने वाले खुशी ने कहा कि वो दसवीं में अपने बेहतरीन परिणाम का श्रेय सबसे पहले खुद को फिर अपने माता पिता और दादा को देना चाहती हैं। उसने बताया कि दादाजी ने सामाजिक विज्ञान में उसकी काफी सहायता की थी, जिसके कारण इस विषय में 100 फीसदी अंक हासिल किए हैं। खुशी ने बताया कि वो लक्ष्य बनाकर बिना किसी तनाव के पढ़ाई करती थी। स्कूल में रोजाना जो भी पढ़ाया जाता था रोज घर आकर उसका अध्ययन करती थी। उसने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है। खुशी के पिता जहां सरकारी नौकरी में हैं वहीं माता सरकारी अध्यापिका हैं। खुशी पढा़ई के अलावा खेलकूद में भी दिलचस्पी रखती हैं और राष्ट्रीय स्तर पर कैरम खेल चुकी हैं। खुशी ने यह भी बताया कि वो पहली कक्षा से ही ओडीसी नृत्य का प्रशिक्षण ले रही हैं।

स्कोर कार्ड
गणित विज्ञान 100
सामाजिक विज्ञान 100
अंग्रेजी  99 
हिंदी    99
विज्ञान 99
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