यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में हुए 126 करोड़ के भूमि घोटाले की जांच कर रहे सीओ ग्रेटर नोएडा-प्रथम निशांक शर्मा से सीबीआई दिल्ली की टीम ने पूछताछ की है। शनिवार को सीबीआई उन्हें ले गई थी, पूछताछ के बाद उन्हें रविवार शाम छोड़ दिया गया। वहीं, एसएसपी वैभव कृष्ण ने निशांक को ग्रेटर नोएडा-प्रथम के चार्ज से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। इस केस में आशंका जताई जा रही है कि जांच व गिरफ्तारियों के दौरान किसी खामी या शिकायत को लेकर सीबीआई ने सीओ से गहन पूछताछ की है। इस केस में अब तक पीसी गुप्ता समेत छह गिरफ्तारी हो चुकी हैं।
दरअसल, मामले में 3 जून को कासना कोतवाली में पूर्व सीईओ आईएएस पीसी गुप्ता समेत 21 आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पीसी गुप्ता को 22 जून को मध्यप्रदेश के दतिया से गिरफ्तार कर दस दिन की रिमांड पर लेने के बाद मेरठ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया था, तब से वह मेरठ जेल में बंद हैं। उस दौरान केस की जांच तत्कालीन ग्रेटर नोएडा-प्रथम सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव कर रहे थे। उनका नोएडा स्थानांतरण होने के बाद जांच निशांक शर्मा ने शुरू की थी। केस की जांच में छह कंपनियों समेत कई और लोगों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने दावा किया था केस में 36 से अधिक आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं।
सीओ ने की थी पांच गिरफ्तारी
निशांक ने केस की जांच मिलने के बाद 13 दिसंबर को डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर के निदेशक रमेश बंसल को गिरफ्तार किया। इस प्रकरण में एकमात्र जमानत रमेश बंसल को ही मिली है। इसके बाद सतेंद्र चौहान, सत्येंद्र और गांव धमैड़ा (बुलंदशहर) निवासी अधिवक्ता संजीव कुमार को गिरफ्तार किया था। संजीव कुमार प्राधिकरण में तैनात रहे चुके ओएसडी वीपी सिंह का रिश्तेदार है। निशांक शर्मा ने एक के बाद एक पांच गिरफ्तारी की और जल्द बड़ी गिरफ्तारी का दावा कर रहे थे।
सीएम तक मामला पहुंचने के बाद हुई थी पहली गिरफ्तारी
जमीन घोटाले का केस दर्ज होने के बाद पुलिस पर ढिलाई बरतने के आरोप लगे थे। कई टीमें गठित होने और 21 के नामजद होने के बाद भी पुलिस ने एक भी गिरफ्तारी नहीं की थी। इसकी शिकायत यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद पीसी गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। केस की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी।
रणवीर समेत कई के खिलाफ जारी थे गैर जमानती वारंट
मेरठ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने सात तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। इनमें तत्कालीन ओएसडी वीरपाल सिंह, तत्कालीन तहसीलदार सुरेश चंद्र शर्मा, तत्कालीन उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार रणवीर सिंह, तत्कालीन प्रबंधक नियोजन बृजेश कुमार, लेखपाल पंकज कुमार, तत्कालीन नायब तहसीलदार चमन सिंह के नाम शामिल थे।