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CBI ही करेगी बुलंदशहर गैंगरेप कांड की जांच, सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया आदेश

Fri, 09 Sep 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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बुलंदशहर पहुंची सीबीआई की टीम - फोटो : फाइल फोटो
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बुलंदशहर गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस मामले की सीबीआई जांच पर रोक लगाने के अपने आदेश को वापस ले लिया। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को तेजी से जांच करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति सी नगप्पन की पीठ ने अपने 29 अगस्त के उस आदेश में फेरबदल किया है जिसमें इस मामले में सीबीआई जांच पर रोक लगा दी थी। पीठ ने अपना यह आदेश वापस लेते हुए कहा कि सीबीआई ही मामले की जांच करेगी। मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया था।

पीठ ने सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह से कहा ‘हम आपको जांच जारी रखने की इजाजत देते हैं। आप कानून के मुताबिक काम को अंजाम दीजिए।’
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मालूम हो कि सीबीआई ने याचिका दाखिल कर जांच पर रोक के आदेश को वापस लेने की गुहार की थी। याचिका में कहा गया था कि जांच पर रोक से साक्ष्यों को नुकसान पहुंचने या नष्ट होने का खतरा है। 
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'सिस्टम से विश्वास डगमगा सकता है पर मुकदमा चलना चाहिए?'

बुलंदशहर गैंगरेप पीड़‌िताएं अपना बयान दर्ज कराने पहुंची बुलंदशहर अदालत - फोटो : अमर उजाला
साथ ही अगर गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई तो आरोपी जमानत पाने के हकदार हो जाएंगे। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पीठ से पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वकील ने भी कहा उसे सीबीआई जांच से आपत्ति नहीं थी।

 पीड़ित पक्ष द्वारा इस मामले को उत्तर प्रदेश की बजाय दूसरी जगह ट्रांसफर करने की गुहार लगाई गई थी। साथ ही समाजवादी पार्टी नेता आजम खान पर एफआईआर दर्ज करने की गुहार की गई थी। मालूम हो कि आजम खान ने इस मामले को राजनीतिक साजिश बताया था।

पीठ ने बृहस्पतिवार को साफ किया कि मामले को दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने और सत्ता में उच्च पदों पर बैठे ऐसे लोगों की ओर से इस तरह की बयानबाजी, दोनों मामले जीवित रहेंगे और इन पर सुनवाई होगी।  पिछले 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने बुलंदशहर गैंगरेप को ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ बताने वाले उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान के बयान को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह परीक्षण करने का निर्णय लिया है कि क्या सत्ता में बैठे व्यक्ति का ऐसा कोई बयान, जिससे कि पीड़ित पक्ष का सिस्टम पर से विश्वास डगमगा सकता है पर मुकदमा चलना चाहिए? शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इस बात का परीक्षण करेगी की क्या ऐसा बयान अभिव्यक्ति के अधिकार के दायरे से इतर तो नहीं है?

गौरतलब है कि कि गत 29 जुलाई को एक परिवार कार से नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा था। रात करीब डेढ़ बजे बुलंदशहर के पास राजमार्ग पर लुटेरों ने छल से कार रुकवाई और बंदूक की नोंक पर न केवल उनकी नकदी और जेवर लूट लिए बल्कि 32 वर्षीय महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार भी किया। 
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