नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर लगे घोटालों की जांच कर रही सीबीआई ने अब 2002 से 2007 के दौरान नोएडा में बिल्डरों को आवंटित जमीन खंगालनी शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी ने प्राधिकरण से इस अवधि के आवंटन का ब्योरा मांगा है। इससे पहले जांच एजेंसी 2007 से 2012 तक का ब्योरा ले चुकी है। फिलहाल, यादव डासना जेल में बंद हैं। सीबीआई की स्पेशल टास्क फोर्स के एक अधिकारी का पत्र नोएडा प्राधिकरण को सोमवार को मिला है, जिसमें सेक्टर-96, 97 व 98 में आवंटित जमीन का ब्योरा मांगा गया है।
साथ ही, 2002 से 2007 के दौरान अन्य बिल्डरों को भी आवंटित ग्रुप हाउसिंग प्लॉटों की सूची मांगी है। प्राधिकरण ने 2006 में एक ही बिल्डर को सेक्टर-96, 97 व 98 तीनों सेक्टर आवंटित कर दिए थे।
वर्ष 2002 से 2007 के दौरान आवंटन की सूची मांगी
यादव सिंह के बंगले पर छापा
14.07 लाख वर्ग मीटर जमीन की डील करीब 1500 करोड़ रुपये में हुई थी। हालांकि, बिल्डर अब तक इस पूरे एरिया को विकसित नहीं कर सका है। जानकार बताते हैं कि नोएडा में फ्लैट कल्चर की शुरुआत ही 2002 से हुई है। उससे पहले प्राधिकरण प्लॉट आवंटित करता था। 2002 से 2007 के बीच कुछ बड़े आवंटन हुए थे।
सेक्टर-96, 97 व 98 की डील उस समय की सबसे बड़ी डील थी। इस कारण यह उस समय डील काफी चर्चा में रही। एलआईसी से कर्ज के कारण हाल ही में जमीन की नीलामी की सूचना के कारण दोबारा यह आवंटन काफी चर्चा में रहा।
जानकार यह भी बताते हैं कि बिल्डरों को सबसे ज्यादा जमीन 2007 से 2012 के बीच आवंटित की गई। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और नोएडा फेज तीन के ज्यादातर आवंटन इसी अवधि के हैं।