उन्नाव रेप पीड़िता का बयान दर्ज करने की मकसद से सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(दिल्ली) में अस्थायी अदालत का गठन करने के लिए कहा है। मालूम हो कि रायबरेली केपास हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल पीड़िता का फिलहाल एम्स में इलाज चल रहा है। चार दिन पहले ही सीबीआई ने एम्स जाकर पीड़िता का बयान दर्ज किया था। पीड़िता का बयान दर्ज न हो पाने के कारण ही अब तक सीबीआई की जांच पूरी नहीं कर सकी है।
जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट को सुनिश्चित करने केलिए कहा है कि दिल्ली के एम्स में अस्थायी अदालत का गठन हो। इससे पहले सीबीआई ने पीठ को बताया कि पीड़िता की स्थिति को देखते हुए एम्स में अस्थायी अदालत बनाने की दरकार है। जिससे कि ट्रायल के दौरान पीड़िता का बयान रिकार्ड किया जा सके।
साथ ही पीठ ने ट्रायल कोर्ट से यह भी जानना चाहा है ट्रायल पूरा करने केलिए क्या उन्हें और समय की जरूरत है? वहीं उन्नाव मामले से जुड़े सड़क हादसे की जांच को पूरा करने के लिए और दो हफ्ते का वक्त दे दिया है। गंभीर रूप से घायल पीड़िता का फिलहाल एम्स में इलाज चल रहा है और गत दो सितंबर को सीबीआई ने एम्स जाकर पीड़िता का बयान दर्ज किया था। इससे पहले गत 19 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सड़क दुर्घटना मामले की जांच पूरा करने केलिए अतिरिक्त दो हफ्ते का वक्त दिया था।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव से जुड़े पांचों मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था। हालांकि इनमें से सड़क दुर्घटना मामले के ट्रांसफर को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल पीड़िता व उसके वकील को लखनऊ से दिल्ली में एम्स शिफ्ट करने का आदेश दिया था। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह चाहता है कि उन्नाव बलात्कार से जुड़े मामलों में त्वरित और फेयर ट्रायल हो। इन मामलों में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित अन्य आरोपी हैं।