सीबीआई ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पांच अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया है। इन अधिकारियों में एक अवर सचिव भी शामिल है। जांच एजेंसी ने मंगलवार को इन अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की।
11 स्थानों पर हुई छापेमारी में जांच एजेंसी के हाथ क्या सुबूत लगे हैं सीबीआई ने अभी इसका खुलासा नहीं किया है। गौरतलब है डीओपीटी सीबीआई का नोडल विभाग है।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि अवर सचिव संजय मेहता, अनुभाग अधिकारियों हेमंत व विजय पाल और सहायक अनुभाग अधिकारियों आरके अरोड़ा व महेंद्र सिंह के खिलाफ 18 लाख रुपये से अधिक की राशि के भुगतान में कथित अनियमितताओं के लिए मामला दर्ज किया गया है।
इस मामले में सीबीआई ने अशोक नामक एक व्यक्ति और निजी वेंडरों इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक साइंसेज, इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कविता अहलुवालिया, कपिल बुक स्टोर और सहेज ट्रेड्रिंग कॉरपोरेशन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि भुगतान में अनियमितता पाए जाने पर संजय मेहता को निलंबित कर दिया गया था।
सीबीआई ने यह कार्रवाई डीओपीटी की एक शिकायत के आधार पर की है। विभाग के निदेशक (प्रशिक्षण) वीके सिन्हा ने अपनी शिकायत में कहा था कि आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2017-18 में 9.21 करोड़ रुपये के किए जाने वाले कुल 67 भुगतान में 18.17 लाख रुपये गलत तरीके से पांच वेंडरों के नाम जारी किए गए थे। विभाग ने कहा था कि प्रथम दृष्टया इस अनियमितता में विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई है।