नौकरी के बदले जमीन मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में भूमि अधिग्रहण घोटाला मामले में आरोपों पर सुनवाई हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दलील दी कि लालू प्रसाद यादव से जुड़े भूमि के बदले नौकरी घोटाला मामले में वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों पर नौकरी के आवेदनों को शीघ्रता से निपटाने के लिए दबाव डाला गया था। सीबीआई के अनुसार, यादव ने अभ्यर्थियों या उनके रिश्तेदारों से काफी कम कीमत पर या उपहार के रूप में जमीन के बदले रेलवे में नौकरियां दिलवाई थी।
वहीं, विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने आरोप पत्र और अभियोजन पक्ष के गवाहों का उल्लेख किया, जिनमें महाप्रबंधक स्तर का एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल था। तर्क दिया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रक्रिया में तेजी लाने और उम्मीदवारों की सूची को मंजूरी देने का दबाव बनाया गया था।
सीबीआई ने तर्क दिया कि बिना छात्रों वाला यह स्कूल सिर्फ जाली प्रमाणपत्र बनाने के लिए ही चल रहा था। यह भी आरोप लगाया गया कि जाली प्रमाणपत्र, मार्कशीट और हस्ताक्षर का इस्तेमाल नौकरी पाने के लिए किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि एक लाख वर्ग फीट जमीन 26 लाख रुपये में खरीदी गई, जिसमें नकद लेनदेन उन व्यक्तियों के साथ हुआ, जिनकी जमीन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यादव के परिवार को रियायती दरों पर बेची गई।