वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली।
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दिल्ली में साल 2014-15 में हुए सड़क घोटाले में लोक निर्माण विभाग के दो अभियंताओं के खिलाफ केस चलेगा। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता जेएस चौहान और कनिष्ठ अभियंता देवी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत केस दर्ज करने की मंजूरी दी है। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17 ए के तहत मामला चलेगा। इन्होंने काम के सत्यापन के बिना ठेकेदार को भुगतान किया था। इस मामले में एलजी ने कहा कि मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड देखने के बाद उनका मानना है कि केस दर्ज करने के बाद आरोपों की जांच करना न्याय के हित में है।
उपराज्यपाल कार्यालय के मुताबिक, रोड्स एंटी-करप्शन ऑर्गनाइजेशन नामक एनजीओ के संस्थापक राहुल शर्मा ने 19 मई 2017 को शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें कहा था कि कालकाजी क्षेत्र के ईपीडीपी रोड (मलिक राम इस्सर मार्ग, नई दिल्ली) में सड़क और फुटपाथ के सुदृढ़ीकरण, जल निकासी व्यवस्था, सेंट्रल वर्ज के सुधार पर कोई काम नहीं हुआ, लेकिन भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इस मामले को सख्ती से लेते हुए एलजी ने जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में कार्यकारी अभियंता के खिलाफ एनसीसीएसए निर्णय लेगा। वह ग्रुप ए अधिकारी हैं। एलजी ने लोक निर्माण विभाग के उन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जिन्होंने एसीबी के काम में बाधा डालकर प्रथम दृष्टया मामला बनाए जाने के बावजूद आरोपी इंजीनियरों को बचाने की कोशिश की थी।
प्रारंभिक जांच के बाद तीन पर दर्ज किया था मामला
एसीबी ने प्रारंभिक जांच के बाद तीन पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के खिलाफ उपरोक्त कार्य से संबंधित शिकायत दर्ज की थी। इसमें कार्यपालन अभियंता आरएस गर्ग, सहायक अभियंता जेएस चौहान व कनिष्ठ अभियंता देवी सिंह शामिल थे।
यह था प्रोजेक्ट
इस कार्य का अनुबंध अनुमानित लागत से 18.79 फीसदी कम 6,33,69,235 रुपये में हुआ। इस कार्य के लिए लागत कंपनी को 7,80,31,320 रुपये दिए गए। इसमें सामान खरीदने से जुड़े मामले में ठेकेदार ने बिटुमेन के चालान प्रस्तुत किए, लेकिन निर्माण में प्रयुक्त अन्य सामग्री के चालान प्रस्तुत नहीं किए गए। बिटुमिन खरीद के संबंध में पीडब्ल्यूडी से मिले 18 चालान की जांच की गई तो फर्जी पाए गए। इसके बाद व्यापार एवं कर विभाग ने ठेकेदार फर्म द्वारा की गई खरीद का भ्रामक रिटर्न दाखिल करने के लिए फर्म पर जुर्माना भी लगाया।