जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने तीन सांसदों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी की शिकायत पर जामिया नगर थाने में इन सांसदों पर बिना अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में घुसने और छात्रों को भड़का कर माहौल खराब करने के आरोपों के तहत यह एफआईआर दर्ज की गई।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, महाराष्ट्र से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी पर यह कार्रवाई की गई है। परिसर में रविवार को भी छात्रों का विरोध जारी रहा। छात्रों के प्रदर्शन और कॉरिडोर पर कब्जे को लेकर अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष ने छात्रों पर बिल्डिंग खाली न करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी है। आरोप है कि छात्रों के इस कब्जे की वजह से विभाग का कामकाज व महिला कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
जामिया में अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहे नेता
जामिया मिलिया इस्लामिया हंगामे को लेकर दिल्ली पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की है उसमें कहा गया है कि राजनेताओं ने अपनी राजनीति के लिए जामिया मिलिया को प्लेटफार्म बना दिया है। इन नेताओं की शह पर 500 से ज्यादा बाहरी लोग जामिया में जबरदस्ती प्रवेश कर गए। इससे जामिया मिलिया का माहौल खराब हो गया और छात्राओं व जामिया की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था। प्राथमिकी में यूपी से आए सांसदों के गुनाह भी गिनाए गए हैं।
प्राथमिकी के अनुसार, 23 अक्तूबर विपक्षी सांसदों और नेता विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना सुरक्षा व्यवस्थाओं की अवहेलना करते हुए दीवार को फांदकर विश्वविद्यालय परिसर में जबरदस्ती घुस गए। उन्होंने परिसर में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। बाद में दिल्ली पुलिस ने उसी रात नौ अन्य व्यक्तियों के साथ उन्हें विश्वविद्यालय के पास से हिरासत में लिया था।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी 21 अक्तूबर को गेट नंबर 4 ए पर ताला तोड़कर परिसर में दाखिल हुए। सपा के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को दिल्ली पुलिस ने उस हिरासत में ले लिए था जब वह 23 अक्तूबर को प्रदर्शनकारियों से मिलने जा रहे थे। साथ ही, कई अन्य राजनेताओं और नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई पूर्व सूचना दिए बिना विरोध स्थल पर पहुंच गए।