राजधानी में बढ़ती जनसंख्या के साथ कारों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इनमें बड़ी संख्या सीएनजी कारों की है। बढ़ती कारों की संख्या के बीच अक्सर राजधानी में चलती कारों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
मयूर विहार में बुधवार और कंझावला में मंगलवार को कुछ ऐसे ही हुआ। चलती कारों में आग लग गई। दिल्ली पुलिस व दमकल अधिकारियों की मानें तो हर दिन राजधानी में औसतन छह कारों में किसी न किसी कारण आग लग जाती है।
लोगों का मानना है कि कारों में आग लगने के लिए सीएनजी जिम्मेदार होती है, लेकिन विशेषज्ञों की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि सीएनजी विस्फोटक गैस नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर में आजकल लाखों की तादाद में सीएनजी से चलने वाली गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में आग उसी कार में लगती है जिसमें गलत तरीके से वायरिंग के अलावा सीएनजी किट अनाड़ी मेकेनिक से लगवाई गई होती है। कुछ मामलों में सर्विस का ध्यान नहीं रखा गया होता है। कुछ बातों का ख्याल रखकर इन हादसों को टाला जा सकता है।
ऑटो एक्सपर्ट अब्दुल वाहिद ने बताया कि शॉर्ट सर्किट से आग लगने की वजह यह है कि आजकल लोग कार में बैट्री की क्षमता से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगवा लेते हैं। छह-छह स्पीकरों के साथ म्यूजिक सिस्टम, जगह-जगह एक्सट्रा लाइटें लगाने के कारण बैट्री पर लोड बढ़ जाता है। वहीं इन सब चीजों को लगवाने के लिए अतिरिक्त वायरिंग करवानी पड़ती है।
अगर आपने ये फिटिंग किसी अनाड़ी मैकेनिक से कराई है तो वह जुगाड़ करके तार जोड़ देता है। बाद में यही तार आग लगने की वजह बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीएनजी वाली कार में आग तो लग सकती है, लेकिन उसकी वजह सीएनजी नहीं होती। आग लगने की वजहें वही रहती हैं। खराब वायरिंग के अलावा अनाड़ी लोगों से गाड़ी की सर्विस कराना आग लगने का बड़ा कारण है।
जहां तक सीएनजी की बात है तो आग लगने की सूरत में भी पेट्रोल तो जरूर आग भड़काने का काम करता है, लेकिन सीएनजी का इसमें कोई रोल नहीं होता। इसके अलावा विशेषज्ञों का कहना है कि सब गाड़ियों में सीएनजी नही लग पाती है, लेकिन लोग जबरदस्ती उन गाड़ियों में भी मैकेनिक से लोकल सीएनजी किट लगवा लेते हैं। यह आग लगने की एक बड़ी वजहों में शामिल होता है।