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Delhi NCR News: धूल रोकने में नाकामी पर सीएक्यूएम की फटकार, नोएडा प्राधिकरण से मांगा जवाब

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आरटीआई के जवाब में हकीकत उजागर...दो निरीक्षणों में 32 सड़कें धूल से बेहाल, 28 जगह मलबा प्रबंधन की व्यवस्था तक नहीं मिली
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माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। नोएडा में बढ़ते निर्माण और विकास कार्यों के बीच धूल प्रदूषण रोकने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सड़क की धूल और निर्माण-ध्वस्तीकरण मलबे के प्रबंधन में लापरवाही मिलने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को मई में कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। सेक्टर-77 निवासी अमित गुप्ता की आरटीआई के जवाब में सामने आई जानकारी से पता चलता है कि आयोग के निरीक्षण में जमीनी स्थिति और प्राधिकरण के दावों के बीच बड़ा अंतर नजर आया।

सीएक्यूएम ने पांच जनवरी को 142 सड़कों का निरीक्षण किया। इनमें चार पर अत्यधिक और 24 पर मध्यम स्तर की धूल मिली। इसके बाद आठ मई को 46 सड़कों की जांच हुई तो 28 स्थानों पर अत्यधिक धूल मिली। कई जगह निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकले मलबे के निस्तारण की व्यवस्था भी नहीं थी। लगातार सामने आई इन कमियों के आधार पर आयोग ने 14 मई को नोटिस जारी किया और 19 मई को प्राधिकरण के अधिकारियों की व्यक्तिगत सुनवाई की।
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आयोग के सामने प्राधिकरण ने अनुपालन रिपोर्ट में दावा किया कि चिह्नित सभी स्थानों पर सुधार के लिए तत्काल कार्रवाई की गई। धूल और मलबा हटाने के साथ मशीनों से सड़क सफाई और पानी का छिड़काव कराया गया। लेकिन सवाल यह है कि नियमित निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर धूल और मलबा प्रबंधन की खामियां आयोग के निरीक्षण में ही क्यों सामने आईं?
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प्राधिकरण ने धूल प्रदूषण के लिए बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया है। दूसरी ओर, उसने सेक्टर-80 में 400 मीट्रिक टन क्षमता का मलबा प्लांट और 14 संग्रह केंद्र स्थापित करने तथा नियमों के उल्लंघन पर करीब नौ करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की जानकारी दी है।
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