वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शनिवार को दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के लिए पीएम उत्सर्जन का नया सख्त मानक 50 मिलीग्राम प्रति एनएम3 प्रस्तावित किया। जो आईआईटी कानपुर के अध्ययन और सीपीसीबी की सिफारिशों पर आधारित है।
दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार को एक निर्देश जारी किया। जिसमें इलाके के उद्योगों के लिए 50 मिलीग्राम प्रति एनएम3 का ज्यादा सख्त पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) एमिशन स्टैंडर्ड का प्रस्ताव दिया गया है।
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अधिकारियों ने बताया कि संशोधित मानक से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सीएक्यूएम ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सिफारिशों पर विचार किया है। ये सिफारिशें आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए अध्ययनों पर आधारित थीं। सीपीसीबी द्वारा गठित तकनीकी समिति ने भी इन मानकों का समर्थन किया। आयोग का मानना है कि 50 मिलीग्राम प्रति एनएम3 का पीएम उत्सर्जन मानक तकनीकी रूप से प्राप्त करने योग्य है। यह मानक पर्यावरणीय रूप से भी आवश्यक है, जैसा कि एक अधिकारी ने बताया।
सीएक्यूएम के निर्देशानुसार, दिल्ली-एनसीआर में संचालित उद्योगों पर यह सीमा लागू होगी। इसमें सीपीसीबी द्वारा चिह्नित 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग शामिल हैं। लाल श्रेणी के मध्यम और बड़े वायु-प्रदूषणकारी उद्योग भी इसके दायरे में आएंगे। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, बॉयलर/थर्मिक फ्लूइड हीटर वाली कपड़ा उद्योग और भट्टी वाले धातु उद्योग भी शामिल हैं।