कारगिल के वार हीरो महावीर चक्र अनुज नैयर को कौन नहीं जानता। दिल्ली के जनकपुरी के 24 साल के इस नौजवान ने देश के सम्मान की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। दुश्मन के ग्रेनेड से घायल होने के बावजूद उन्होंने 9 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मौत के घाट उतार दिया था। उन्होंने अपनी जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन के 7 सिपाहियों के साथ कारगिल के प्वाइंट 4875 को मुक्त कराया था।
टाइगर हिल के ठीक पश्चिम में स्थित इस प्वाइंट पर जमाना कारगिल युद्ध जीतने के लिए महत्वपूर्ण था। अभियान की शुरुआत में ही कैप्टन अनुज के कंपनी कमांडर जख्मी हो गए। उन्होंने अपने हमलावर दस्ते को दो भागों में बांटा। एक का नेतृत्व कैप्टन विक्रम बत्रा और दूसरे का कैप्टन अनुज नैयर को सौंपा। कैप्टन अनुज ने बड़ी फुर्ती से दुश्मनों के तीन बंकर तबाह कर दिए।
घबराए दुश्मनों ने उन्हें निशाना बनाकर ग्रेनेड से हमला किया। ग्रेनेड सीधे उन पर गिरा और वे बुरी तरह जख्मी हो गए। इसके बावजूद कैप्टन अनुज ने दुश्मनों के बचे एक और बंकर को भी तबाह कर दिया और 9 घुसपैठियों को मार गिराया। इस लड़ाई में वे शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
बचपन से ही बिजली की तरह चपल थे अनुज
दिल्ली स्कूल आफ इकोनॉमिक्स के विजिटिंग प्रोफेसर एसके नैयर और डीयू के साउथ कैंपस स्थित लाइब्रेरी में कार्यरत रही मीना नैयर के पुत्र अनुज बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि और बिजली की तरह चपल थे। मीना नैयर बताती हैं कि अनुज बचपन में ही हवा में बातें करते थे। बड़े होने के साथ ही वे सेना में जाने का सपना देखने लगे थे। इसीलिए परिजनों ने उनका दाखिला धौला कुआं स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में कराया। वे एनडीए से ग्रेजुएट हुए। वहां से निकलने पर 1997 में उन्हें जाट रेजीमेंट की 17वीं बटालियन में कमीशन मिल गया। मां ने बताया कि शहीद होने के बाद अनुज का पार्थिव शरीर जनकपुरी आया तो पूरा दिल्ली उमड़ पड़ा था।
सड़क स्कूल और लाइब्रेरी को दिया नाम
अनुज नैयर की शहादत के सम्मान के लिए जनकपुरी बी-2 ब्लॉक की सड़क, सरकारी मिडिल स्कूल और डीयू की एक लाइब्रेरी का नाम उनके नाम पर रखा गया है। पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव में कारगिल हिल्स पेट्रोल पंप अनुज नैयर की मां और पिता मिलकर चला रहे हैं। अब वे यहीं पर रहते भी हैं।