व्यापारियों ने कहा, टैक्स ढांचा सरल हुआ तो बाजार में फिर से लौटेगी रौनक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देशभर के कारोबारी वर्ग की निगाहें टिकी हुई हैं। वर्षों से टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठे कारोबारियों ने इस बार भी सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं, हालांकि पिछली घोषणाओं के अनुभव को देखते हुए उनके भीतर निराशा का भाव भी झलक रहा है। राजधानी के कारोबारियों ने कहा कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था उनके लिए जटिल और बोझिल होती जा रही है, जिससे व्यापार की गति प्रभावित हो रही है। कारोबारियों ने जीएसटी की दरों में कमी को अपनी प्रमुख मांग बताया है। उनका कहना है कि ऊंची जीएसटी दरों के कारण लागत बढ़ रही है और उपभोक्ता मांग पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी में कटौती की मांग करते हुए व्यापारियों ने कहा कि आयात-निर्यात से जुड़े कारोबार को इससे बड़ी राहत मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
बोले, बाजार में होना चाहिए लचीलापन
कारोबारियों ने कहा कि बाजार में लचीलापन होना चाहिए और इसे हासिल करने के लिए महंगाई को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा उनका कहना है कि अगर सरकार रिटर्न और अनुपालन की प्रक्रिया को आसान कर दें, तो छोटे व्यापारियों को मदद में राहत मिल सकती है। बजट से सबसे ज्यादा उम्मीद ज्वेलरी कारोबारियों को है। सोना-चांदी के बढ़ते दाम पर अपनी आपबीती में वह बताते हैं कि महंगाई से बाजार की हालात इतनी खराब है कि कोई खरीदारी करने को तैयार नहीं है।
बजट 2026 से कारोबारियों की उम्मीद
मौजूदा समय में कागजी काम और अनुपालन की प्रक्रिया अत्यधिक बढ़ गई है, जिससे व्यापार करना कठिन होता जा रहा है। अलग-अलग विभागों के नियमों के चलते व्यापारियों को बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। इससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है। प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए।
-विक्रम बधवार, जनरल सेक्रेटरी, कनॉट प्लेस मार्केट एसोसिएशन
बजट से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि टैक्स में कुछ राहत मिले, ताकि लोगों के हाथ में खर्च करने लायक पैसा बचे। कपड़ा कारोबार पर जीएसटी का बोझ दरों से ज्यादा प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण महसूस होता है। अगर सरकार रिटर्न और अनुपालन की प्रक्रिया आसान कर दे, तो छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
-विवेक शर्मा, कपड़ा व्यापारी, सरोजिनी नगर
हमारा कारोबार तेजी से घूमने वाली पूंजी पर आधारित है, जिसमें नकदी का सतत प्रवाह बेहद जरूरी होता है। अगर आगामी बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण, आसान शर्तों के साथ क्रेडिट सपोर्ट और कार्यशील पूंजी की बेहतर व्यवस्था की जाती है, तो इससे थोक व्यापार को नई मजबूती मिलेगी।
-अशोक रंधावा, अध्यक्ष, सरोजिनी नगर मिनी मार्केट एसोसिएशन
कारोबारी को तरह-तरह के टैक्स से राहत मिल जाए। ज्वैलरी कारोबारी इस समय सबसे ज्यादा घाटे में चल रहा है। केवल सोने-चांदी के दाम बढ़ रहे है और मुनाफा घटता जा रहा है। सरकार को इसे नियंत्रण में लाने के लिए योजना बनानी चाहिए। इसके अलावा जीएसटी भरने के अंतराल को 10 दिन से बढ़ाकर छह महीना या एक साल पर किया जाए।
-पवन राज खन्ना, चांदनी ज्वैर्ल्स (चांदनी चौक)
ज्वेलरी कारोबारियों को जीएसटी, कस्टम ड्यूटी, इंश्योरेंस के साथ लोडिंग-अनलोडिंग समेत शिपिंग समेत कई प्रकार के टैक्स मिलाकर 13 से 15 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है, जिससे मुनाफे की उम्मीद धुंधली हो जाती है। ऐसे में कस्टम ड्यूटी को 9 से घटाकर 3 से 6 प्रतिशत और जीएसटी को तीन से एक प्रतिशत करना चाहिए।
-अरुण चौधरी, सचिव, सीआर पार्क वेलफेयर एसोसिएशन