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'42 वेंडर हटाए जाएं': दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- मोबाइल वेंडिंग की अनुमति लेकर स्थायी दुकान नहीं चला सकते

Mon, 31 Aug 2026 07:54 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनंतिम वेंडिंग प्रमाणपत्र रखने वाले फुटपाथ विक्रेता स्थायी वेंडिंग स्थल का दावा नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि ये प्रमाणपत्र विशेष शर्तों के तहत जारी होते हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (सीओवी) रखने वाले स्ट्रीट वेंडर स्थायी या फिक्स्ड वेंडिंग साइट का दावा नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि प्रोविजनल सीओवी विशेष शर्तों के तहत जारी किए जाते हैं। इसलिए इनके आधार पर किसी निश्चित जगह पर स्थायी रूप से दुकान लगाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

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अदालत 42 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उनके पास प्रोविजनल सीओवी हैं। लिहाजा नगर निगम को उनकी वेंडिंग की निर्धारित जगह स्पष्ट करनी चाहिए। एमसीडी ने बताया कि इनमें से अधिकतर मोबाइल वेंडर हैं और उन्हें कोई स्थायी वेंडिंग साइट आवंटित नहीं की गई है।

खंडपीठ ने रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता मोबाइल वेंडर की तरह काम करने के बजाय स्थायी दुकानें चला रहे थे। कई जगह फुटपाथ और पैदल मार्ग पर कब्जा किया गया था जिससे यातायात और पैदल आवाजाही प्रभावित हो रही थी।
 
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कोर्ट ने कहा कि प्रोविजनल सीओवी में स्पष्ट शर्तें होती हैं। वेंडर को टाउन वेंडिंग कमिटी के तय समय और जोन का पालन करना होगा। पैदल यात्रियों और यातायात में बाधा डालने या अतिक्रमण करने की अनुमति नहीं है। अदालत ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह सभी 42 याचिकाकर्ताओं के प्रमाणपत्रों का सत्यापन करे। नियमों का उल्लंघन करने वालों को एमसीडी हटा सकेगी।
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