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National Cancer Survivors Month : एआई के शिकंजे में फंस रहा कैंसर, आसान हो रही पकड़

Sat, 28 Jun 2025 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

एआई आधारित उपकरण से मुंह के कैंसर की पकड़ आसान हो गई है। वहीं महिलाओं में होने वाले कैंसर की जांच दूर-सुदूर बैठे डॉक्टर भी आसानी से कर पा रहे हैं।
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demo - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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देश में हर साल लाखों लोगों की जिंदगी छीन रहा कैंसर अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के शिकंजे में फंसने लगा है। एआई आधारित उपकरण से मुंह के कैंसर की पकड़ आसान हो गई है। वहीं महिलाओं में होने वाले कैंसर की जांच दूर-सुदूर बैठे डॉक्टर भी आसानी से कर पा रहे हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि देश में हर साल लाखों कैंसर के मरीज दम तोड़ देते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज होते हैं। इसके अलावा स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़ों सहित दूसरे कैंसर के मरीज भी होते हैं। कैंसर की पहचान में देरी होने से इलाज जटिल हो जाता है।

ऐसे में कैंसर को जल्द पकड़ने के लिए विकसित हो रहे एआई उपकरण की मदद से आशा वर्कर भी कैंसर के सेल को पकड़ने में सक्षम हो पाई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का डाटा बताता है कि 2022 में भारत में कैंसर के 14.1 लाख से अधिक नए मामले सामने आए और 9.1 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। यदि मरीज पहले या दूसरे स्टेज में अस्पताल पहुंच जाता है तो उसके ठीक होने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है।
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24 हजार लोगों की हुई जांच, परिणाम मिले बेहतर
मशीन लर्निंग, इमेज प्रोसेसिंग, डाटा एनालिसिस के सहयोग से विकसित एआई आधारित आरोग्य आरोहण एप-2 की मदद से पिछले एक साल में मथुरा, वृंदावन क्षेत्र में 24 हजार से अधिक लोगों के मुंह की जांच हुई। एम्स के डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. दीपिका मिश्रा ने बताया कि इस एप की मदद से आशा वर्कर भी मुंह की फोटो लेकर आकलन लगा सकती हैं। उक्त परिणाम के आधार पर मरीज को आगे की जांच के लिए अस्पताल में रेफर किया जा सकता है। परीक्षण के दौरान एक मरीज के करीब 10 फोटो लिए गए। इस दौरान 90 फीसदी परिणाम सटीक पाए गए। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में शुरू किया जा सकता है।

महिलाओं में कैंसर के लिए चल रहा काम
एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पूर्व प्रमुख पद्मश्री डाॅ. नीरजा भटला ने कहा कि महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर की जल्द पहचान के लिए मोबाइल एप तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इसी एप का विस्तार आशा वर्कर या मरीजों के लिए किया जाएगा। यह एआई आधारित एप कैंसर की जल्द पकड़ में मददगार बन सकेगा। वहीं एम्स के दूसरे विशेषज्ञों ने बताया कि डीएनए की जांच से सर्वाइकल कैंसर की पकड़ हो सकेगी। हमारे खून में ऐसे सेल्स फ्री (सीएफ) डीएनए मौजूद होते हैं, जिसका बढ़ना सर्वाइकल कैंसर का कारक हो सकता है। मरीज के खून का सैंपल लेकर लैब में ड्रापलेट डिजिटल पीसीआर (डीडीपीसीआर) जांच कर उन सेल्स फ्री डीएनए की पहचान और इस कैंसर का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

इलाज में आया सुधार
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल ने कहा कि कैंसर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रहे तकनीक में सुधार से मरीजों का जीवन सुधरा है। एडवांस स्टेज के मरीज पहले की तुलना में दोगुना जीवन और दूसरे कैंसर के मरीज जल्द ठीक हो रहे हैं।
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