जिला उपभोक्ता फोरम ने एक बिल्डर के अलग-अलग प्रोजेक्ट में दो आवंटियों के रद्द किए फ्लैट की लीज डीड 30 दिनों में करने का आदेश दिया है। इससे पहले आवंटी को पूरा पैसा जमा करना होगा।
नोएडा के सेक्टर 100 निवासी चंद्रवती सिंह ने 24 मई 2010 को पंचशील बिल्डर की ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 16-ए की आवासीय सोसायटी में फ्लैट बुक किया।
फ्लैट बुकिंग करने के दौरान 1,30,500 रुपये का भुगतान किया। बाद में बिल्डर ने बकाया पैसा जमा करने के लिए आवंटी को नोटिस भेजा। इलाहाबाद कोर्ट के आदेश पर निर्माण रुकने के चलते प्राधिकरण ने जीरो पीरियड घोषित कर दिया था।
आवंटी के संपर्क करने पर बताया गया कि उसको नोटिस जारी कर दो जनवरी तक किश्त जमा करने को कहा था। किश्त जमा नहीं होने पर आवंटन रद्द कर दिया।
वहीं एक अन्य मामले में मेरठ गंगानगर निवासी शशि प्रभा त्यागी पत्नी सतपाल त्यागी ने भी सेक्टर-1 में फ्लैट बुक किया। चार नवंबर 2010 से 20 जनवरी 2011 के बीच 1,41,789 रुपये का भुगतान किया।
छह फरवरी 2011 को बिल्डर की डिमांड पर आवंटी 5,67,154 रुपये जमा करने पहुंची तो बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए पैसे लेने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में वाद निस्तारण के बाद बिल्डर ने ब्याज लगाकर 6,74,439 रुपये मांगे।
आवंटी पैसा जमा करने पहुंची तो बिल्डर ने केवल ब्याज राशि 84,216 रुपये जमा करवाएं। इसके बाद भी बिल्डर ने 15 जनवरी 2013 को फ्लैट का आवंटन रद्द कर दिया।
दोनों मामले में आवंटियों ने जिला उपभोक्ता फोरम गौतमबुद्धनगर में वाद दायर किया। फोरम ने मामले को सुना। मामले को सुनने के बाद फोरम ने दोनों आवंटी के नाम फ्लैटों की लीज डीड करने के आदेश दिए। इससे पहले 30 दिनों के अंदर आवंटी को पूरी कीमत अदा करने का आदेश दिया है।