दिल्ली यूनिवर्सिटी के विभागों एवं कॉलेजों में आरक्षण संबंधी रोस्टर तैयार करने के लिए कॉलेजों के एससी-एसटी, ओबीसी के लायजन ऑफिसर की एक वर्कशॉप हुई। डीयू में स्थायी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने से पहले इसे काफी अहम माना जा रहा है।
डीयू के कलस्टर इनोवेशन सेंटर में हुई इस वर्कशॉप में डीओपीटी की ओर से आए अधिकारी का कहना था कि 200 प्वाइंट पोस्ट बेस रोस्टर को 2 जुलाई 1997 से लागू करना होगा। उसी को आधार मान कर कॉलेज को एक यूनिट मानकर वरिष्ठता के आधार पर 200 प्वाइंट रोस्टर बनाना होगा।
बताया जा रहा है कि डीओपीटी अधिकारी जब जानकारी दे रहे थे तब डीयू अधिकारियों ने कहा कि हमारे यहां रोस्टर 2013 से लागू है। इसे कार्यकारी परिषद में पास किया गया है लिहाजा उसे ही लागू करना होगा। ऐसे में कॉलेजों के लायजन अधिकारी भड़क गए।
डीयू एकेडमिक काउंसिल सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि वर्क शॉप में डीयू के शिक्षकों को रोस्टर के नाम पर भ्रमित करने का प्रयास किया गया। डीओपीटी अधिकारी जो निर्देश दे रहे थे उसे यूनिवर्सिटी को मानना चाहिए था।
उन्होंने आगे कहा कि एससी - एसटी, ओबीसी फोरम इसकी शिकायत और एक याचिका संसदीय समिति में करेगा। इस मामले को आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में उठाया जाएगा।