हाईकोर्ट ने स्कूली बच्चों को गर्मी व सर्दी में एक-एक ड्रेस प्रदान करने की नीति को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल उठाया की एक ही ड्रेस से पूरी गर्मियां या सर्दियां बच्चे कैसे निकाल सकते हैं।
अदालत ने नार्थ एमसीडी को बच्चों को प्रदान की जाने वाली वर्दी व पाठ्य सामग्री उपलब्घ कराने संबंधी नीति पेश करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान उत्तरी एमसीडी के अधिवक्ता ने बताया के उन्हानें अपने सभी छह जोन के निगम प्राथमिक विद्यालयों में पढने वाले करीब चार लाख बच्चों को इस वर्ष वर्दी प्रदान कर दी है।
उन्होंने कहा कि सर्दियों के लिए बच्चों को एक फूलबाजू की शर्ट, गर्मियों के लिए हाफबाजु की शर्ट और इसी प्रकार एक निकर व पेंट प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सभी बच्चों को कॉपी, किताब व अन्य पाठय सामग्री भी प्रदान कर दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में याची अधिवक्ता के उस तर्क पर सहमति जताई की बच्चों को मिलने वाली वर्दी अपर्याप्त है। दरअसल, अग्रवाल ने अदालत को बताया कि सभी बच्चे हर सप्ताह कम से कम पांच दिन स्कूल में जाते हैं।
ऐसे में पूरे सप्ताह में एक पेंट एक शर्ट से वे कैसे स्कूल आ सकते हं। यह अपर्याप्त है उन्होंने कहा कि कम से कम गर्मी व सर्दी के मौसम में बच्चों को दो-दो वर्दियां मिलनी चाहिएं।
अग्रवाल ने अदालत को कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून में पर्याप्त वर्दी व पाठय सामग्री प्रदान करने का प्रावधान है लेकिन उत्तरी एमसीडी बच्चों को वह नहीं दे पा रही है।
उनके इस तर्क पर उत्तरी एमसीडी के अधिवक्ता ने वर्दी व पाठय सामग्री उपलब्ध कराने के मामले में अपनी वित्तिय हालत का भी हवाला दिया, उन्होंने कहा कि पर्याप्त फंड न होने के कारण ही बच्चों को वर्दी प्रदान करने में देरी होती है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना की बच्चों को मिलने वाली वर्दियां अपर्याप्त है अदालत ने एमसीडी को शपथपत्र सहित वर्दी प्रदान करने की नीति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम को इस मद में क्या सहायता प्रदान की जा रही है।