दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव सितंबर में ही हुए हैं, लेकिन एनएसयूआई ने वर्ष 2018 के चनाव के लिए भी अभी से कमर कस ली है। एनएसयूआई छात्र संघ चुनाव में महत्वपूर्ण लिंगदोह समिति की सिफारिशों में परिवर्तन चाहती है। उसकी मांग खासकर बैलेट पेपर के उपयोग की है।
एनएसयूआई ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान ऑनलाइन वोटिंग का भी प्रस्ताव दिया। संगठन का कहना है कि छात्र चुनाव में हिंसा की आशंका रहती है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कॉलेज या विश्वविद्यालय की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन मतदान प्रणाली तैयार की जाए।
उम्मीदवार के प्रचार के लिए खर्च सीमा 5 हजार रुपयेे है। सोशल मीडिया अभियानों के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। ऐसे में इस व्यय सीमा संशोधन की जरूरत है। एनएसयूआई अध्यक्ष फिरोज खान ने कहा कि चुनाव कराने के लिए अलग संस्था होनी चाहिए, जो कि चुनाव के दौरान आने वाली शिकायतों का निस्तारण करे।
एनएसयूआई ने इस दौरान विद्यार्थियों की शिकायतों के निपटारे के लिए छात्र अदालत की भी मांग उठाई। साथ ही प्रवेश अधिकार, व्यावसायिक विकास, पारदर्शी बजट और फीस जैसे मुद्दों पर छात्र चार्टर की बात कही।