राजधानी के निजी स्कूलों में दाखिले का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए शिक्षा निदेशालय ने भी कमर कस ली है। दरअसल, स्कूलों को लॉटरी की वीडियोग्राफी करानी होगी।
इतना ही नहीं उस फुटेज को तीन माह तक रखना होगा। वहीं, लॉटरी के संबंध में अग्रिम सूचना भी देनी होगी। बीते सालों में अभिभावकों की शिकायत रही थी कि उन्हें इस संबंध में सूचित ही नहीं किया गया।
आवेदन प्रक्रिया 27 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। 15 फरवरी से चयनित बच्चों की सूची आने लगेगी। निदेशालय ने स्कूलों को ऐसे मानक तैयार करने को कहा है जो कि अच्छी तरह से परिभाषित, न्यायसंगत, सुस्पष्ट व पारदर्शी हो।
मानकों के आधार पर लॉटरी की स्थिति बनती है तो पारदर्शी तरीके से अभिभावकों की उपस्थिति में ही किया जाए। लॉटरी के लिए बॉक्स में बच्चों के नाम की स्लिप अभिभावकों को दिखाकर डाली जाए। अभिभावक इस प्रक्रिया पर सवाल ना उठा सके।
स्कूलों को वीडियोग्राफी कर तीन माह तक रखनी होगी। ऐसा देखने में आया है कि लॉटरी की सूचना अभिभावकों को दी नहीं जाती और स्कूल हेराफेरी करते हैं। अभिभावकों को खासी परेशानी होती है।
उन्हें यह पता ही नहीं चल पाता कि लॉटरी कब हो गई और बच्चे का नाम क्यों नहीं आया। इतना ही चुपके से लॉटरी कर बच्चे के नाम की सूचना अभिभावकों को भेज दी जाती है।