दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार मई-जून में हुई यूजी कोर्सेज की परीक्षाओं के रिजल्ट देर से आने की संभावना बन रही है। दरअसल, यूजीसी की ओर से शिक्षकों के लिए सेवा शर्तों की अधिसूचना के विरोध में एक बार फिर से शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बहिष्कार का फैसला किया है।
उल्लेखनीय है कि शिक्षक बीते 24 मई से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं कर रहे हैं। मूल्यांकन के लिए बनाए गए सभी सेंटरों पर एक भी शिक्षक मूल्यांकन के लिए नहीं पहुंच रहा है।
शिक्षकों के लिए जारी यूजीसी श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज सभागार में मंगलवार को आम सभा की गई। सभा में तय किया गया कि वह 11 जून तक मूल्यांकन का बहिष्कार करेंगे।
वहीं, यूजीसी की अधिसूचना के खिलाफ आगामी 10 जून को मंडी हाउस से मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक काली पट्टी बांधकर मार्च करेंगे। डूटा अध्यक्ष डॉ. नंदिता नारायण के मुताबिक बीते सोमवार को यूजीसी पर धरने के बावजूद कोई राहत नहीं मिली है। यह अधिसूचना लागू होने पर देशभर के लगभग दो लाख शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे।
आम सभा में डीयू एससी-एसटी, ओबीसी, टीचर्स फोरम के अध्यक्ष प्रो हंसराज सुमन ने यूजीसी की अधिसूचना वापस लेने की मांग की है साथ ही कोटे के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया सही रोस्टर प्रणाली के आधार पर की जाए।
सही रोस्टर का पालन न होने से शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है। खालसा में आम सभा के बाद शिक्षकों ने खालसा कॉलेज से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के कार्यालय तक मार्च निकाला और अपनी बातें रखीं।