उच्च शिक्षा में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते युवाओं में आत्महत्या के मामलों को देखते हुए अब कॉलेज के शुरुआती दिनों में छात्र पढ़ाई से दूर रहेंगे। दरअसल सरकार ने इसी सत्र से आईआईटी की तर्ज पर उच्च शिक्षण संस्थानों के अकादमिक कलेंडर में इंडेक्शन प्रोग्राम को लागू कर दिया है।
सरकार का मकसद छात्रों का तनाव कम करना, समाज से जोड़ना, मानवीय मूल्यों को बढ़ाना, लैंग्वेज में सुधार, नालेज बढ़ाना, सीनियर्स से दोस्ताना माहौल बनाना है। यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से कुलपतियों को इसी सत्र से इंडेक्शन प्रोग्राम लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ पहली बार तैयार इंडेक्शन पॉलिसी भी सांझी की गई है।
संस्थानों को सात से पंद्रह दिन तक इंडेक्शन प्रोग्राम के तहत काम करना होगा। इस दौरान छात्रों में मानवीय मूल्य, बड़ों का आदर व छोटों से प्रेम, महिलाओं का सम्मान, देशप्रेम की भावना को जागृत किया जाएगा। संस्थानों को इंडेक्शन प्रोग्राम की रिपोर्ट तैयार करके यूजीसी को भेजनी होगी।
हाथ में किताब नहीं पर मन और शरीर होगा फिट
विश्वविद्यालयों व कालेजों में पहली बार सभी छात्रों को फिजिकल एक्टिविटी में भाग लेना अनिवार्य होगा। इसके माध्यम से छात्र के मन और शरीर को मजबूत करना है। स्थानीय मौसम के माध्यम पर प्रबंधन फिजिकल एक्टिविटी का चयन कर सकते हैं।
ये हैं रूपरेखा :
. पहले दिन छात्र की प्रेरणा और अभिभावकों की छात्र से उम्मीद पर चर्चा की जाएगी।
. दूसरे दिन दूसरों की मदद करना व दूसरे जब मदद करते हैं का पाठ पढ़ाया जाएगा। छात्र अपने अनुभव भी साझा करेंगे।
. तीसरे दिन शरीर और मन की जरूरतों के आधार पर बात होगी।
.चौथे दिन तनाव पर बात होगी और कम करने पर सुझाव को अमल में लाया जाएगा।
. पांचवें दिन देश की समृद्ध विरासत, संस्कृति व विकास पर चर्चा की जाएगी।
. छठें दिन रिलेशनशिप पर बात होगी, जिसमें समाज, परिवार, पड़ोसी व दोस्त की जरूरत पर बात होगी।