बच्चों के दिमागी बीमारी के इलाज और इस संबंध में नए अनुसंधान के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च एंड एक्सीलेंस फॉर चाइल्डहुड न्यूरोडेवलपमेंटल डिस्ऑर्डर की शुरुआत की जा रही है।
इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 14.3 करोड़ रुपये की बजट को मंजूरी दे दी है। कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) की ओर से सेंटर को इलाज और रिसर्च के लिए हर वर्ष आठ लाख रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी।
एम्स-प्रशासन का कहना है कि यहां बन रहे मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक में ही इस सेंटर की शुरुआत की जाएगी। इस संबंध में एक विस्तृत योजना एम्स पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. वीके पॉल और प्रो. डॉ. शेफाली गुलाटी की अध्यक्षता में बनाई गई है। इस संबंध में एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. बलराम की अध्यक्षता में इसी माह 15 फरवरी को एक अहम बैठक भी हुई थी।
सेंटर में बच्चों के मस्तिष्क से संबंधित सभी तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज और इलाज के तौर-तरीकों को विकसित करने के लिए काम किया जाएगा। इस सेंटर में मिर्गी का इलाज और इसके लिए भी शोध करने का निर्णय लिया गया है। इस सेंटर में चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मरीजों को टेलीफोन पर भी बीमारियों के इलाज और बचाव की जानकारी दी जाएगी।