विरोध प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों के गुस्से का बांध एक बार फिर टूट गया। हजारों की संख्या में आक्रोशित शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में उन्होंने नियुक्ति, पेंशन, समायोजन, पदोन्नति व अनुबंध पर शिक्षकों की भर्ती के मुद्दे को लेकर अपना विरोध जताया। इस दौरान शिक्षकों की पुलिस से काफी झड़प भी हुई। शिक्षकों में कुलपति केखिलाफ इतना गुस्सा था कि कई बार प्रदर्शन हिंसक होते-होते बचा।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(डूटा) के आह्वान पर 17 जनवरी व 18 जनवरी को हड़ताल की घोषणा की गई थी। इसी कड़ी में शुक्रवार को कुलपति कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में शिक्षकों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों को कार्यालय तक जाने से रोकने केलिए पुलिस की ओर से जबरदस्त बेरिकेडिंग की गई थी। कैंपस में भारी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती थी। पुलिस की मौजूदगी में कई बार शिक्षक आपे से बाहर हुए। डीयू में ठेकेदारी प्रथा की शुरुआत करने को लेकर भी शिक्षकों में काफी रोष दिखाई दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में तदर्थ शिक्षक थे जो कि ठेकेदारी प्रथा का विरोध कर रहे थे।
शिक्षकों का आरोप है कि पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार की तरह ही शुक्रवार को भी शिक्षकों पर बल का प्रयोग किया। इस दौरान शिक्षकों को मामूली चोटें भी आई। डूटा उपाध्यक्ष सुधाशुं कुमार ने कहा कि हम किसी भी कीमत पर शिक्षकों की अनुबंध आधार पर भर्ती को स्वीकार करने वाले नहीं है। डीयू प्रशासन को इसे वापस लेना ही होगा और तदर्थ शिक्षकों को समायोजित करना होगा। उल्लेखनीय है कि बीते बृहस्पतिवार को भी शिक्षकों ने हड़ताल करते हुए रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक मार्च किया था। शिक्षकों के इस प्रदर्शन को जेएनयू शिक्षक संघ का समर्थन भी मिला। संघ ने शिक्षकों से समर्थन देने के लिए काली पट्टी बांध कर काम करने की अपील की थी।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी
डीयू प्रशासन के रवैये को देखते हुए शिक्षक अब अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। इसको लेकर स्टॉफ एसोसिएशन का भी सहयोग लिया जाएगा। माना जा रहा है कि 31 जनवरी तक शिक्षक इस विषय में रणनीति तय कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।