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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त

Fri, 04 Nov 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हैं बावजूद इसके दिल्ली सरकार ने अदालत व अन्य कामों के लिए 176 शिक्षण स्टाफ को तैनात कर दिया है। सरकार के इस रवैये से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए दायर याचिका के आधार पर सरकार को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जब स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों के पद रिक्त हैं और शिक्षकों अन्य कार्य में लगाने से बच्चे कैसे शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं।

अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 दिसंबर तय की है। सोशल ज्युरिस्ट एनजीओ द्वारा दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2001 में दिए गए आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है।
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आदेश में कहा गया था कि बच्चों की पढ़ाई के ध्यानार्थ राजधानी के सभी स्कूलों में प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के प्रारंभ में यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी शिक्षक का पद रिक्त न हो।
याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि राजधानी के दिल्ली सरकार व एमसीडी के स्कूलों में विकलांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों सहित शिक्षकों के 26,031 पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में नौ हजार शिक्षकों के पदों का सृजन किया था और बावजूद इसके आधे से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

उन्होंने कहा वर्तमान में 80 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल के पद रिक्त हैं तो दिल्ली सरकार के स्कूलों में स्नातकोत्तर शिक्षकों के 7463 और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों के 13623 पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भर्ती न होने के कारण 1011 स्कूलों में पढ़ रहे 15,40,691 छात्रों की शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी के बावजूद 176 शिक्षण स्टाफ  की डयूटी पिछले कई वर्षों से अदालत के काम में लगा रखी है जबकि उनकी हाजिरी शिक्षण कार्य के लिए लगती है।
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