दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने का सपना देख रहे हैं और कोर्सेज में 80-90 फीसदी के कारण दाखिला नहीं मिल पा रहा है, तो 45-75 फीसदी अंक भी डीयू में दाखिले के रास्ते खोल सकते हैं। जी हां, डीयू के तमाम कॉलेजों में बीए संस्कृत ऑनर्स में 45 से 75 फीसदी पर एंट्री हो सकती है। ऐसे में डीयू में पढ़ने का सपना साकार हो सकता है, बशर्ते आप संस्कृत पढ़े हुए हों। खास बात यह है कि दाखिले के पहले दिन शिवाजी कॉलेज में तो संस्कृत ऑनर्स में चार दाखिले भी हो गए।
डीयू में दाखिले के लिए संस्कृत ऑनर्स कोर्स हमेशा से सबसे आसान विकल्प माना जाता रहा है। आमतौर पर 50 से 60 फीसदी अंक वाले छात्रों को आसानी से इन कोर्सेज में दाखिला मिल जाता था। लेकिन टॉप कॉलेजों को छोड़ दें तो कई कॉलेजों में इस कोर्स की सीटें भरने में दिक्कत आती है। बीते सालों के मुकाबले इस साल की कट ऑफ पर नजर डालें तो बहुत ज्यादा इजाफा संस्कृत ऑनर्स की कट ऑफ में नहीं हुआ। संस्कृत कोर्स की कट ऑफ लिस्ट आज भी 50 से 60 प्रतिशत के दायरे में है। आगे की लिस्ट में यह कट ऑफ और कम हो सकती है। इस समय डीयू के 27 कॉलेजों में संस्कृत ऑनर्स का विकल्प है।
इस साल की कट ऑफ में संस्कृत ऑनर्स के लिए सबसे कम कट ऑफ कालिंदी कॉलेज ने 45 फीसदी रखी है। यह कट ऑफ बीते साल के समान ही है। टॉप कॉलेज रामजस की बात की जाए तो उसने अपने यहां संस्कृत ऑनर्स की कट ऑफ 75 फीसदी और हिंदू ने 74 फीसदी रखी है तो वहीं आईपीयू ने 74 और मिरांडा ने 70 फीसदी कट ऑफ रखी है। किरोड़ीमल कॉलेज ने 60 फीसदी कट ऑफ रखी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि दयाल सिंह ने इस कोर्स के लिए सबसे अधिक 85 फीसदी कट ऑफ रखी है।
इस लिहाज से छात्रों के पास कम अंक प्रतिशत के बावजूद अभी भी डीयू के तमाम कॉलेजों में दाखिले का मौका है। विभिन्न कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्कृत लेने में छात्रों में क्रेज थोड़ा कम होता है। हिंदी ऑनर्स की सीटें तो पॉपुलर कॉलेज में भर जाती हैं लेकिन कई जगह ऐसा नहीं हो पाता है। वहीं संस्कृत की भी सीटें पॉपुलर कॉलेजों में ही भर पाती हैं।