500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने का प्रभाव शहर के स्कूलों पर भी दिख रहा है। अभिभावक स्कूल आकर बच्चे की एक साथ नगद में साल भर की फीस जमा करने के लिए बोल रहे हैं। हालांकि स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि हम लोग सिर्फ चेक से ही फीस लेते हैं। वैसे भी एकसाथ इतनी फीस नहीं ले सकते।
नोटबंदी का असर अब हर जगह दिखने लगा है। जहां एक तरफ कंपनियों में कर्मचारियों को एक साथ एक साल की सैलरी देने पर बातचीत चल रही है, वहीं कुछ दुकानदार 500 रुपये का नोट लेकर सस्ता सामान महंगे में ग्राहकों को थमा रहे हैं।
अब स्कूलों में भी अभिभावक जाकर एक साथ बच्चे की फीस जमा कराने की बात कह रहे हैं। लोग हर तरह से पुराने नोटों को खपाना चाह रहे हैं, ताकि उनको बैंकों की लाइन में खड़े होने से राहत मिल जाए।
शहर के एक नामी स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि हमारे पास कई अभिभावक आ रहे हैं, जोकि बच्चे की सारी फीस एक साथ कैश में जमा करने की बात बोल रहे हैं। ऐसे एक -दो नहीं, बल्कि कई अभिभावक फीस लेने का निवेदन कर चुके हैं, लेकिन हम लोगों ने एक साथ फीस लेने से मना कर दिया है। वैसे भी हम लोग सिर्फ चेक से ही फीस लेते हैं।
500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने से हम लोगों को थोड़ी परेशानी हो रही है। बड़ा स्कूल होने की वजह से रख-रखाव व अन्य चीजों के लिए पैसों की जरूरत रहती ही है। ऐसे में थोड़ी परेशानी है, लेकिन कुछ दिन में ये सब ठीक हो जाएगा।--रेनू सिंह, प्रिंसिपल, एमिटी स्कूल
एडवांस में मिली सैलरी
जिला अस्पताल में नर्स और ऑटो टेक्नीशियन समेत कई विभागों में प्राधिकरण की तरफ से संविदा पर कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने की वजह से कई कर्मचारियों को 2 से 3 महीने की सैलरी एडवांस में दे दी गई है।