मेवात में अपग्रेड हुए स्कूलों में नये सत्र में छात्र छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से ग्रामीण बच्चों को दूर जाकर कस्बे के स्कूलों में दाखिला लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अपग्रेड स्कूलों में प्रवेश शुरू कराने की मांग की है। ताकि ग्रामीण आंचल के गरीब छात्र छात्राएं को आसानी से बेहतर शिक्षा मिल सके। काबिले गौर है की बीते वर्ष मेवात के 27 मिडिल स्कूलों का दर्जा बढाकर हाई किया गया था।
इनमे चार गर्ल स्कूलों को भी अपग्रेड किया गया था। दर्जा मिलने के बाद बच्चों के अभिभावकों में उमीद जगी थी, की अब उनके बच्चों को नजदीक के स्कूलों में जहां बेहतर तालिम उपलब्ध होंगी।
वहीं उनकी बेटिया भी बिना संकोच के गांवों में ही शिक्षा ग्रहण कर सकेंगी। लेकिन अपग्रेड होने के एक वर्ष बाद भी स्कूलों में बच्चो को 10 वीं कक्षा में प्रवेश नही दिया जा रहा है। जिससे बच्चों व उनके अभिभावकों में सरकार के प्रति रोष है। हालात यह हैं कि छात्र छात्राएं सरकारी स्कलों के बजाए निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए जाने लगे हैं।
गांव छारौड़ा, धुलावट, गुरनावट व निजामपुर व राहड़ी के सरंपच अराशद, नाजरीन, दयावती, जमशेद व ग्रामीण निशार, शेर मोहमद मेवाती , पूर्व पंच मौ0 हाशिम मेवाती, जमालुदीन, रामकिशन पंच विनोद, परवेज, आदि ने बताया की गत वर्ष सरकार द्वारा तावडू खंड़ के गांव छारौड़ा ,राहडी, निजामपुर, गुरनावट व धुलावट सहित अन्य खंड़ो के 27 मिडिल स्कूलों को दर्जा बढ़ाकर हाई किया गया था। लेकिन दर्जा बढने के बाद ग्रामीण छात्र छात्राओं को दसवीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिल रहा है।
उन्होंने बताया की राजकीय स्कूलों में अधिकतर गरीब परिवार से संबंधित बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। सरकारी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर निजी स्कूलों का रुख करना पड़ रहा है।
यह स्कूल हुए थे अपग्रेड: बीते वर्ष ग्रामीणों की मांग पर मेवात के 27 मिडिल स्कूलो को अपग्रेड किया गया था। जिनमे नेवाना, तुसैनी, रायपुर, अहमदबास, रावली, रनियाला, नंगला मुबारकपुर, मूलथान, हसनपुर नूंह, चंदेनी, दिहाना, टांई, धुलावट, छारोड़ा, गुरनावट, निजामपुर, राहड़ी, देवला, नंगली, सुडाका, मुरादबास, रेहना बाल विद्यालय सहित शिकरावा, शहचौखा, इंदाना व मांडी खेड़ा के गर्ल स्कूल शामिल थे। इन गांवों के विद्यार्थी 9 वीं व 10 वीं कक्षा की पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों या कस्बों में जाते थे। इन स्कूलों को लंबे वक्त से अपग्रेड करने की मांग चल रहीं थी। इसके चलते इन्हें अपग्रेड का दर्जा दिया गया था।