दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2017-18 से स्कूल ऑफ जर्नलिज्म सेल्फ फाइनेसिंग मोड की बजाए रेगुलर मोड में शुरू होगा। डीयू की कार्यकारी परिषद (एग्जिक्यूटिव काउंसिल) की बैठक में इस पर मुहर लग गई है। शुक्रवार दोपहर शुरू हुई यह बैठक शनिवार सुबह चार बजे समाप्त हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ अजय कुमार भागी ने बताया कि स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के प्रस्ताव को पास कर दिया गया है।
इसके फीस ढांचे को तय करने के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। अंग्रेजी के साथ-साथ जर्नलिज्म का पाठ्यक्रम हिंदी में भी होगा। दोनों के लिए 60-60 सीटें होंगी। इस स्कूल के अंतर्गत चलने वाले पांच वर्षीय इंटरग्रेटिड जर्नल्जिम कोर्स में तीन साल पूरा करने पर बैचलर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक डीयू में जर्नलिज्म का अलग से विभाग नहीं है। अब इसी स्कूल के अंतर्गत इस विभाग को बनाए जाने की बात कही गई है। साथ ही कॉलेजों में जो जर्नलिज्म के कोर्स चल रहे हैं उन्हें भी इस स्कूल के साथ जोड़े जाने की योजना है।
इसके अलावा दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 28 कॉलेजों की गवर्निग बॉडी के गठन की प्रक्रिया वालेे मामले पर डीन ऑफ कॉलेज के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है जो अपनी रिपोर्ट वीसी को देगी। बैठक में अनुबंध पर काम कर रहे नॉन टीचिंग कर्मचारियों की सैलेरी को भी बढ़ाने की मंजूूरी मिल गई है। अब उन्हें 8 जुलाई 2016 से बढ़ी हुई सैलेरी मिलेगी।
परिषद सदस्य डॉ राजेश झा ने बताया कि हमने बैठक में कहा कि दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म को कुछ बदलाव करने के लिए एकेडमिक काउंसिल के पास वापस भेजा जाए। उन्होंने कहा कि इसके पाठ्यक्रम पर जर्नलिज्म शिक्षकों की जनरल बॉडी मीटिंग में विचार नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने इस स्कूल में गेस्ट फैकल्टी को नियुुक्त करने के प्रावधान का भी विरोध किया। डॉ भागी ने बताया कि दयाल सिंह कॉलेज इवनिंग को मॉर्निंग में बदलने का प्रस्ताव सैदंतिक रुप से पास हो गया है।
ईसी सदस्य डॉ भागी ने बताया कि जिन शिक्षकों की 2008 से 2013 के बीच प्रमोशन लटकी है। उन्हें राहत देने के लिए संशोधन किया जाएगा। ताकि आसान शर्तों पर उनका प्रमोशन हो सके।