15 अक्तूबर शनिवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में विश्व विद्यार्थी दिवस मनाया गया, लेकिन इसी दिन प्रदेश के शिक्षा के फैसले ने छात्रों को 'कलाम’ बनने की राह में रोड़ा पैदा कर दिया।
माध्यमिक स्कूलों से शिक्षकों को रेशनेलाइजेशन के नाम पर कई स्कूलों से विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की पद घटा दिए तो कहीं खत्म ही कर दिया। अब बिना विज्ञान व गणित के शिक्षक के छात्रों में वैज्ञानिक सोच कैसे पैदा होगी।
सेक्टर-4/7 स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छठीं से आठवीं के 800 विद्यार्थी है उन्हें पढ़ाने के लिए पहले 4 गणित अध्यापक थे और विज्ञान के 3 पद थे परन्तु अब केवल एक गणित की पोस्ट दी गई है विज्ञान के सारे पद खत्म कर दिए है।
कादीपुर के राजकीय स्कूल में 1000 विद्यार्थी पर केवल एक गणित का पद है। विज्ञान का एक भी नहीं। खाण्डसा स्थित राजकीय स्कूल में छात्रों की संख्या 800 से ऊपर है केवल एक गणित अध्यापक का पद दिया गया है साइंस का कोई पद नहीं। अमूमन सभी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों से साइंस का पद खत्म कर दिया, गणित का केवल एक पद दिया है।
इसी तरह हिन्दी, सामाजिक विज्ञान के पद खत्म कर दिए है जबकि सभी स्कूलों में छात्र संख्या 150 से 1000 तक है। ऐसे में कैसे छात्रों के साथ न्याय होगा? इसे लेकर शिक्षक संघ सवाल उठाने लगे हैं।
केवल माध्यमिक और सिंगल सेक्शन हाई स्कूल में शिक्षकों के पदों की संख्या बढ़ा दी गई है। हालांकि वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में पद खत्म करने के पीछे विभाग का तर्क है कि पीजीटी शिक्षक पढ़ाएंगे। जबकि उनके पास पहले से विद्यार्थी की संख्या अधिक है।
बता दें कि शिक्षा विभाग द्वारा 10 अक्तूबर को जारी की गई लिस्ट में हजारों टीजीटी (माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों) के पदों को सरपलस कर दिया था।
जिसे लेकर अध्यापक सघं ने सभी जिलों पर प्रदर्शन किए तो शिक्षा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद 15 अक्तूबर को दोबारा से रेशनलाइजेशन की गई। उसमें कई पदों को खत्म कर दिया गया।