केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बस्तों केबोझ को कम करने को लेकर दी गई हिदायत के बाद अब शिक्षा निदेशालय भी हरकत में आ गया है। शिक्षा निदेशालय ने बोझ से बच्चों के स्वास्थ्य पर हो रहे प्रभावों के मद्देनजर बस्तों के वजन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूलों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रिंसिपल इस बात को सुनिश्चित करें कि बच्चों के बैग भारी न हो। साथ ही स्कूल बैग की नियमित आधार पर निगरानी करने के लिए कहा गया है।
अतिरिक्त शिक्षा निदेशक(स्कूल) डॉ सुनीता रानी की ओर से जारी गाइडलाइंस में बस्ते के भार को कम करने के तरीके भी बताए गए हैं। ऐसा देखा गया है कि बस्तों के भारी वजन से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ऐेसे में स्कूल के प्रिंसिपल व शिक्षक हर कक्षा के प्रत्येक सेक्शन के मुताबिक ऐसे टाइम टेबल बनाए जिससे कि बच्चों को ज्यादा पुस्तकें ना लानी पड़े। ऐसे पीरियड़ लगाए जाएं, जिनमें व्यवहारिक गतिविधियां शामिल हों। बड़ी कक्षाओं केबच्चों को संदर्भ पुस्तकें लाने के लिए हतोत्साहित किया जाए।
अभिभावक बच्चों को हमेशा यह याद दिलाएं कि टाइम टेबल से ही किताबें स्कूल लेकर जाएं। निदेशालय ने अपनी गाइडलाइंस में कहा है कि क्रमबद्ध तरीके से होमवर्क देने की योजना बनाई जानी चाहिए। स्कूल बैग केभार से लगातार बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों के विषय में शिक्षकों व अभिभावकों में जागरूकता लाई जाए।
स्कूल अपने हेल्थ एजुकेशन प्रोग्राम में बैग उठाने की तकनीक के विषय में बताएं। अभिभावकों को चाइल्ड फ्रैंडली बैग खरीदने की सलाह दी जाए जो कि आरामदायक होने के साथ-साथ वजन में हल्के हों।