फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘यूजीसी की अधिसूचना न मानने पर अनुदान हो जाएगा बंद’

Sat, 04 Mar 2017 10:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
JNU, DELHI - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जेएनयू प्रशासन ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि 2016 में जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अधिसूचना के तहत एक प्रोफेसर का मार्गदर्शन पाने के लिए छात्रों की संख्या तय की गई है और यह बाध्यकारी है।
विज्ञापन


5 जुलाई 2016 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि एक प्रोफेसर किसी भी बिंदु पर तीन एमफिल और आठ से अधिक पीएचडी करने वाले छात्रों को गाइड नहीं करेगा। जेएनयू के छात्र अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं।

उनका आरोप है कि इस अधिसूचना के बाद सीटों की कमी हो जाएगी। छात्र 9 फरवरी से जेएनयू प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर धरने पर बैठे हैं। न्यायमूर्ति वीके राव के समक्ष जेएनयू की ओर से पेश अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि यूजीसी के नियमों को मानने के लिए विश्वविद्यालय बाध्य है।
विज्ञापन


यदि विश्वविद्यालय यूजीसी द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता, तो उसको मिलने वाला अनुदान बंद कर दिया जाएगा और वह डिग्री भी प्रदान नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि 43 केंद्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही यूजीसी की अधिसूचना से बंधे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता छात्रों ने कहा कि वे यूजीसी की अधिसूचना को चुनौती नहीं दे रहे। अधिसूचना की आड़ में उनके भविष्य को लेकर धमकाया जा रहा है और वे मात्र पर्यवेक्षक की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

वहीं, अधिवक्ता अरोड़ा ने कहा कि याची छात्रों ने अभी तक यूजीसी को अपनी याचिका में पक्ष नहीं बनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 14 मार्च तय करते हुए उन्हें यूजीसी को पक्ष बनाने को कहा है।

बुधवार को दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और वे प्रशासनिक ब्लॉक से 50 मीटर की दूरी पर हैं। वहीं, जेएनयू प्रशासन ने अदालत से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें