विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों को सर्कुलर जारी कर पीएचडी को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया है। जिसके मुताबिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षिक पदों पर नियुक्ति हेतु रेगुलर पीएचडी होना अनिवार्य है।
सर्कुलर में उच्च शिक्षा में 2010 के चौथे संशोधन का हवाला देते हुए 11 जुलाई 2016 के अधिसूचना को आधार बनाया गया है। यूजीसी के इस नए सर्कुलर से पहले से एडहॉक पर पढ़ा रहे शिक्षकों में ऊहापोह की स्थिति है।
क्योंकि इसमें बहुत से शिक्षकों ने डिस्टेंस एजुकेशन से पीएचडी की है, जिनके भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है। डीयू के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन के मुताबिक यूजीसी के पीएचडी को लेकर रोज नए सर्कुलर से दुविधा की स्थिति बन रही है।
उन्होंने कहा कि यूजीसी की 22 फरवरी 2017 को हुई बैठक में तय किया गया था कि पीएचडी किसी भी विश्वविद्यालय में फुल टाइम (पूर्ण कालिक) या पार्ट टाइम (अर्द्धकालिक) की गई हो उसे रेगुलर डिग्री माना जाएगा।
मगर ऐसी डिग्री किसी विश्वविद्यालय की ऑर्डिनेंस और बॉयलाज के अनुसार हो और विश्वविद्यालय को डिग्री (पीएचडी) कराने का अधिकार प्राप्त हो। प्रो. हंसराज सुमन के मुताबिक अब नए सर्कुलर से फिर दुविधा की स्थिति बन गई है।
उन्होंने बताया कि यूजीसी हर महीने कोई न कोई अधिसूचना जारी करके शोधार्थियों और एडहॉक पर पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। जो शिक्षक नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) और पीएचडी करने के बाद एडहॉक के तौर पर पढ़ा रहे हैं, वे इस सर्कुलर के बाद इस सिस्टम से बाहर हो जाएंगे।