दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव प्रचार में प्रिंटेड पोस्टर का इस्तेमाल उम्मीदवार के साथ-साथ मुद्रक को भी महंगा पड़ सकता है। प्रचार में प्रिंटेड पोस्टर का प्रयोग प्रतिबंधित होने के कारण प्रशासन ने इस बार मुद्रक पर भी शिकंजा कसने का फैसला किया है।
डीयू प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को कहा है कि वह उम्मीदवारों के प्रिंटेड पोस्टर छापने वाले मुद्रकों की न केवल पहचान करें, बल्कि उनके खिलाफ कार्रवाई भी करें। प्रचार के लिए पोस्टर चिपका कर समूहों में चल रही कारों को भी जब्त करें।
डूसू मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. डी. एस रावत ने बताया कि हर पोस्टर पर मुद्रक का नाम व नंबर होता है। ऐसे में मुद्रक की पहचान करना आसान होगा।
नौ सितंबर को होने वाले डूसू चुनाव के लिए छात्र संगठनों की ओर से भले ही नाम तय नहीं हुए हों, लेकिन टिकट के दावेदारों ने अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
संभावित उम्मीदवारों की दौड़ में शामिल दावेदार इन दिनों समर्थकों के साथ कॉलेज-कॉलेज चक्कर लगा रहे हैं। ये लग्जरी गाड़ियों में पोस्टर लगाए रहते हैं।
हर चीज की वीडियोग्राफी
आम जनता से भी अनुरोध किया गया है कि वह इस तरह की पोस्टर लगी कारों को देखने पर पुलिस को सूचित करें। डीयू प्रशासन हर चीज की वीडियोग्राफी नियमित रूप से करा रहा है, ताकि नामाकंन पूरा होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। प्रो. रावत ने बताया कि जो भी छात्र आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ चुनाव के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मामला दर्ज करने का अनुरोध
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों के मुख्य चुनाव आयुक्त प्रो. रावत ने तीनों नगर निगमों के आयुक्तों को भी पत्र भेजा है। इसमें एमसीडी से सार्वजनिक संपत्ति को खराब करने पर दिल्ली संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। सार्वजनिक संपत्ति को विकृत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है।