प्रदेश सरकार एक तरफ खेल से जुड़ी प्रतिभाओं को तराशने के लिए तमाम योजनाएं बना रही है, लेकिन इन प्रतिभाओं को कॉलेजों में दाखिले के लिए आम छात्रों से कम पापड़ नहीं बेलने पड़ते। देश के तमाम विश्वविद्यालयों में खिलाड़ियों के लिए कॉलेजों में सीटें आरक्षित रहती हैं। वहीं प्रदेश के कॉलेजों में इस तरह की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में खेल से जुड़ी प्रतिभाओं के लिए दाखिले का पैमाना तो निर्धारित किया गया है, लेकिन इस पैमाने के मुताबिक भी कई बेहतर खिलाड़ी दाखिले की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के नियमानुसार ग्रेड के आधार पर दाखिले के दौरान मेरिट सूची में खिलाड़ियों को अंकों की छूट दी जाती है।
उदाहरण के तौर पर ए-वन ग्रेड वाले खिलाड़ी को पांच प्रतिशत अंकों की छूट दी जाती है। यानि कटऑफ लिस्ट के आधार पर आम छात्र की तुलना में खिलाड़ी को पांच प्रतिशत अंकों की रियायत मिल जाती है। ए-वन श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके खिलाड़ियों को ही रखा जाता है। इसी तरह से राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी की ग्रेड कम होती जाती है। कम ग्रेड को ध्यान में रखते हुए उन्हें अंकों में छूट भी कम ही मिलती है। खेल से जुड़ी प्रतिभाओं की ग्रेडिंग करने का काम जिला खेल विभाग को करना होता है।
जिला स्तर से लेकर नेशनल स्तर तक खेलने वाले खिलाड़ियों की जिले में कोई कमी नहीं है। स्पोर्ट्स कोटे के लिए सीट आरक्षित न होना खेल के साथ पढ़ाई की राह में अड़चन बन जाता है। हालांकि, विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए नियम सभी कॉलेजों के लिए मान्य होते हैं, लेकिन निजी कॉलेज तो निर्धारित पैमाने के मुताबिक भी दाखिला देने की भी जरूरत नहीं समझते।