सामाजिक उपेक्षा के शिकार ट्रांसजेंडरों को उच्चतर शिक्षा विभाग ने नकार दिया है। विभाग द्वारा प्रदेश के तमाम सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए मांगे जा रहे आवेदन में ट्रांसजेंडरों के लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया है।
जबकि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) ने अपने शैक्षणिक विभाग में दाखिले के लिए मांगे आवेदन में ट्रांसजेंडरों को मौका दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांसजेंडरों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देने के बाद सभी शिक्षण संस्थानों को अपने यहां दाखिला देने को कहा था।
इसके लिए आवेदन प्रक्रिया के लिंग कॉलम में बाकायदा ट्रांसजेंडर अंकित करने को कहा था। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भी इस बाबत आदेश जारी किया था।
इसके बावजूद उच्चतर शिक्षा विभाग ने इस सत्र में दाखिले के लिए मांगे आवेदन में जगह नहीं दी है। जिसकी वजह से ट्रांसजेंडर आवेदन करने से चूक सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में लिंग की श्रेणी में ट्रांसजेंडर को स्थान नहीं दिया गया है।
अभी तक ट्रांसजेंडर छात्रों को दाखिला नहीं मिलता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर को सामान्य छात्रों के साथ पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ था, लेकिन उच्चतर शिक्षा विभाग ने सारे आदेश को दरकिनार कर कहीं स्थान नहीं दिया।
बता दें कि ट्रांसजेंडर छात्रों को विशेष पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा जाएगा। आरक्षित वर्ग को जो सुविधाएं, छात्रवृत्ति हॉस्टल आदि दी जाती हैं सभी मिलेगी। ट्रांसजेंडर की सुरक्षा की गारंटी भी संस्थान को लेनी है। जिससे कोई इन छात्रों को जाति सूचक शब्द या लिंग आधारित अभद्रता न करे।
कब-कब भेजे गए हैं आदेश
यूजीसी की ओर से ट्रांसजेंडर को दाखिला देने के लिए कई बार पत्र भेजा गया है। 20 अक्तूबर को सभी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को निर्देश दिए गए। 29 अक्तूबर 2014, 02 फरवरी 2015 को सभी यूनिवर्सिटी के चांसलर को बाकायदा पत्र भेजा गया। 26 मार्च 2016 को भी इस बाबत पत्र सभी संस्थानों के लिए जारी किया गया।
सबसे पहले आईटीआई ने दिया था स्थान
हरियाणा में सबसे पहले आईटीआई ने अपने दाखिले में ट्रांसजेंडरों को प्राथमिकता दी थी। पिछले वर्ष आवेदन के वक्त सभी कोर्स में आवेदन की छूट दी थी। आईटीआई अगली बार से निकलने वाली भर्ती में ट्रांसजेंडरों को मौका देने पर भी विचार कर रहा है।