यदि किसी स्कूल में दाखिला कराने के एक माह के भीतर अभिभावक अन्य जगह के लिए पहली वाली सीट छोड़ते हैं तो एडमिशन, रजिस्ट्रेशन व एक माह की ट्यूशन फीस काट कर स्कूलों को बाकी राशि वापस करनी होगी।
वहीं, अगर एक माह बाद अभिभावक ऐसा करते हैं तो स्कूल फीस वापस करने को बाध्य नहीं होंगे। अभिभावकों का कहना है कि सरकार पुरानी फीस रिफंड पॉलिसी का ही नोटिफिकेशन जारी कर दे ताकि स्कूलों की मनमानी न झेलनी पड़े।
स्कूलों में दाखिले शुरू हो गए हैं। लेकिन फीस किस मद में ली जाएगी यह तय नहीं है। स्कूल अभिभावकों से तय राशि जमा करवा रहे हैं। एक स्कूल ने 58 हजार रुपये जमा करवा लिए।
वहीं, कुछ ने 52 हजार, किसी ने 45 हजार । पूछने पर बताया जा रहा कि फीस तय नहीं है। परेशानी यह कि दाखिले के बाद अगर स्कूलों ने अत्यधिक फीस की डिमांड कर दी तो अभिभावक क्या करेंगे।
हर स्कूल अलग अलग राशि जमा करवा रहे हैं। इतना ही नहीं कई स्कूल ड्राफ्ट की जगह नगद राशि देने का दबाव बना रहे हैं।
सूची जारी होने के बाद स्कूलों की नई नई मनमानी सामने आ रही है। साकेत स्कूल स्थित एपीजे स्कूल ओरिएंटेशन के नाम पर 58 हजार रुपये की मांग कर रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल फीस ले रहा है तो सिर्फ मेलजोल और जानकारी के लिए रुपये की मांग क्यों कर रहा है। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा का कहना है कि स्कूलों ने इस तरह का धंधा बना लिया है।
उन्हें सरकार का कोई डर नहीं है। जब सरकार ने फीस बढ़ोतरी पर लगाम रलगा रखा है, तो इस पर भी रोक लगाए। ताकि, अभिभावकों को इन सब से राहत मिल सके।