सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े स्कूलों को अपनी दाखिला नीति बनाने की छूट इस कारण दी गई थी कि वे अपने समुदाय के बच्चों को दाखिला दें।
उक्त स्कूल मोटी राशि लेकर दूसरे समुदाय के बच्चों को दाखिला प्रदान कर मुनाफा कमाने में लगे हैं। यह आरोप लगाते हुए दाखिले से वंचित छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार व डीडीए से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने इस याचिका के आधार पर दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय, डीडीए के अलावा कई अल्पसंख्यक स्कूलों से भी जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पहली कक्षा में पढ़ने वाले छात्र आशीष की ओर से पेश अधिवक्ता खगेश झा ने अदालत को बताया कि अल्पसंख्यक स्कूल अपने समुदाय के कम आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों को दाखिला देने की जगह गैर अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को दाखिला देकर मोटी रकम कमाने में लगे हैं।
यह सरासर हाईकोर्ट के फैसले का उल्लंघन है। अल्पसंख्यक वर्ग से संबंधित बादली निवासी आशीष के पिता ने बेटे का पहली कक्षा में दाखिला कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला। याची के अधिवक्ता ने कहा कि दाखिला नीति स्वयं बनाने की छूट के कारण उक्त स्कूल ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया में नहीं है।