तकनीकी शिक्षण संस्थानों में मिशन एडमिशन का अंतिम दौर चल रहा है। काउंसलिंग व मैनेजमेंट कोटे के तहत दाखिला लेने वाले छात्र अपनी पसंद व रुचि के हिसाब से कॉलेज और ब्रांच का चुनाव कर रहे हैं।
कॉलेजों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीटेक में इस बार कंप्यूटर साइंस (सीएस) की मांग सबसे अधिक है। वहीं शैक्षिक सत्र 2014-15 की बात करें तो उस समय मैकेनिकल और सीएस की मांग करीब-करीब बराबर थी।
पिछले दो सालों से सीएस ब्रांच के छात्रों को लगातार मिल रहे बेहतर प्लेसमेंट की वजह से इस बार इसकी मांग सबसे ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि सीएस में देश भर के तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्लेसमेंट बेहतर हुआ है।
एनआईईटी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग) डॉ. प्रवीण पचौरी ने बताया कि पिछली बार मैकैनिकल और सीएस ब्रांच की डिमांड लगभग बराबर थी, लेकिन इस बार सीएस की मांग दूसरे में सभी ब्रांचों से कहीं ज्यादा है।
इसकी वजह सॉफ्टवेयर कंपनियों में नौकरी के ज्यादा अवसर का होना है। वहीं द्रोणाचार्य इंस्टीट्यूट के अश्विनी कुमार ने बताया कि पिछले साल की तरह इस साल भी सीएस (कंप्यूटर साइंस) की सबसे अधिक डिमांड रही।
अश्विनी कुमार का मानना है कि सीएस, आईटी, मैकेनिकल, ईसी सहित सभी ब्रांच का छात्र अच्छी नौकरी पा सकता है। उनका कहना है ब्रांच चुनने में दूसरों की कॉपी न करें। अभिभावक भी दबाव न डालें।
आईआईएमटी इंजीनियरिंग कालेज के डीन एकेडमिक आशीष वर्मा का कहना है कि एडमिशन के लिए आने वाले लगभग 60 प्रतिशत छात्रों की डिमांड सीएस ही है।
इसको देखते हुए कालेज स्तर पर टेस्ट के बाद ही ब्रांच दी गई। इस साल सीएस ब्रांच में दाखिला लेने वाले छात्र ऋगवेद पांडेय और आयुष राजपूत का कहना है कि मार्केट में आईटी प्रोफेशनल की मांग बढ़ रही है।